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ASSAM असम। PHD चेंबर ऑफ कॉमर्स और इंडस्ट्री ने हाल ही में एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया, जिसका उद्देश्य देशभर के GI (Geographical Indication) उत्पादों को एक प्रभावशाली मंच प्रदान करना है। इस पहल का उद्देश्य विभिन्न राज्यों के अद्वितीय और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्पादों—चाहे वे खाद्य वस्तुएँ हों, हस्तशिल्प या वस्त्र—को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाना है। कार्यक्रम के दौरान PHD चेंबर की निदेशक कंचन जुत्शी ने कहा, “यह पहल MSME मंत्रालय, भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। हमारा उद्देश्य प्रत्येक राज्य के GI उत्पादों को पहचान देना और उन्हें बाजार में उचित स्थान उपलब्ध कराना है। इससे न केवल स्थानीय उद्योगों और कारीगरों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि उनकी सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान को भी संरक्षित किया जा सकेगा।”
GI उत्पादों में क्षेत्रीय विशेषताओं का समावेश होता है, जो उन्हें देश और विदेश में अलग पहचान दिलाता है। यह कार्यक्रम व्यापारियों, निवेशकों और आम जनता के लिए एक ऐसा मंच उपलब्ध कराता है, जहां वे सीधे उत्पादक और कारीगरों से जुड़ सकते हैं और उनके उत्पादों को समझ सकते हैं। इस पहल के माध्यम से छोटे और मध्यम उद्योगों, स्टार्टअप्स, और महिला उद्यमियों को विशेष अवसर प्रदान किए गए हैं। कंचन जुत्शी ने बताया कि कार्यक्रम में प्रदर्शित हस्तशिल्प, खाद्य पदार्थ और वस्त्र हर राज्य की सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे न केवल उद्योग को आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि स्थानीय परंपराओं को संरक्षण भी मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि GI उत्पादों के वैश्विक मानकों के अनुरूप गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण सत्र और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। यह पहल उद्योगों और कारीगरों के उत्पादन कौशल, विपणन रणनीति और निर्यात क्षमता को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करेगी। स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के व्यापारिक प्रतिनिधियों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया और व्यापारिक सहयोग, निवेश और निर्यात के नए अवसरों पर चर्चा की। कार्यक्रम में उपस्थित उद्योग विशेषज्ञों ने GI उत्पादों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इससे देश की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान दोनों मजबूत होगी।
कार्यक्रम के माध्यम से MSME मंत्रालय ने यह संदेश दिया कि भारतीय उद्योग और कारीगर वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं। यह पहल छोटे और मध्यम उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग और मार्केटिंग के अवसर उपलब्ध कराएगी। उद्घाटन समारोह में विशेष रूप से स्थानीय हस्तशिल्पियों, महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स को सम्मानित किया गया। उनके उत्पादों की प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन, पारंपरिक वस्त्र और डिज़ाइन उत्पाद शामिल थे।
कुल मिलाकर, यह पहल भारत के GI उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में एक मील का पत्थर साबित होगी। कार्यक्रम के माध्यम से न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय कौशल को भी संरक्षित किया जाएगा। कंचन जुत्शी ने अंत में कहा, “हम चाहते हैं कि हर राज्य का विशेष और अद्वितीय उत्पाद पूरे देश और दुनिया के लोगों तक पहुँचे। यह कार्यक्रम उद्योग और कारीगरों के लिए नए व्यावसायिक अवसर और स्थायी आर्थिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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