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गुवाहाटी: गुवाहाटी के असम इंजीनियरिंग कॉलेज (AEC) में 50 से अधिक छात्र तब बीमार पड़ गए, जब उन्होंने हॉस्टल की पानी की टंकी का इस्तेमाल किया, जिसमें एक मृत बंदर मिला। इस घटना ने कैंपस में पानी की सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
यह मामला तब सामने आया जब हॉस्टल नंबर 7 के छात्रों ने पानी की सप्लाई से अजीब सी बदबू आने की शिकायत की। इसके बाद की गई जांच में पानी की टंकी के अंदर एक मृत बंदर मिला।
रिपोर्ट्स के अनुसार, बंदर का शव लगभग एक हफ्ते तक टंकी के अंदर पड़ा रहा, और इस दौरान छात्र उसी पानी का इस्तेमाल अपने रोजमर्रा के कामों के लिए करते रहे। बताया जा रहा है कि इसी पानी का इस्तेमाल हॉस्टल की मेस में खाना बनाने के लिए भी किया गया था।
छात्रों को इस बात की गहरी चिंता है कि शायद दुर्गा पूजा के समय से ही यह दूषित पानी इस्तेमाल हो रहा था। इससे यह सवाल उठता है कि इतने लंबे समय तक किसी को इस समस्या का पता क्यों नहीं चला और क्या पानी की टंकियों की नियमित जांच की जा रही थी या नहीं।
इस घटना के बाद 50 से अधिक छात्र बीमार पड़ गए, जिन्हें इलाज के लिए जालुकबारी स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।
प्रभावित छात्रों में से कुछ ठीक हो गए हैं, जबकि कई अन्य का अभी भी इलाज चल रहा है। कुछ छात्रों को ड्रिप (IV फ्लूइड्स) दी जा रही है और वे अपने हॉस्टल के कमरों में ही हैं।
इस घटना ने हॉस्टल में पीने के पानी की कमी को लेकर छात्रों की पुरानी शिकायतों की ओर भी सबका ध्यान खींचा है। छात्रों ने समय पर जांच न होने पर सवाल उठाए हैं, खासकर तब जब इस पानी का इस्तेमाल पीने और खाना पकाने, दोनों के लिए किया जा रहा था।
इस घटना ने इंजीनियरिंग कॉलेज में हॉस्टल के पानी के प्रबंधन, साफ-सफाई और पीने के पानी की सुविधाओं की निगरानी को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
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