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गुवाहाटी: असम के धेमाजी ज़िले की बोरडोलनी ग्राम पंचायत के लोगों ने मगुवाहोला में मौजूद 1,044 बीघा सरकारी चरागाह ज़मीन को 'ग्राम वन' (village forest) के तौर पर विकसित करने का फ़ैसला किया है। इसका मकसद वहाँ की जैव-विविधता और प्राकृतिक आवास को बचाना है।
यह फ़ैसला शुक्रवार को 'सेवा संकल्प अभियान' और 'वन्यजीव सप्ताह' के तहत हुई एक खास ग्राम सभा में लिया गया। 'द असम ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहल धेमाजी ज़िला प्रशासन और वन विभाग के सहयोग से की जाएगी।
प्रस्तावित मगुवाहोला ग्राम वन हिरण, कई तरह के पक्षियों और अलग-अलग तरह के जलीय जीवों का घर है।
इस बैठक में धेमाजी के विधायक और मंत्री रानोज पेगू, सांसद प्रदान बरुआ और चायदुआर के विधायक जीवन गोगोई शामिल हुए। पेगू ने 'संस्कार उत्सव' और 'ग्राम विकास योजना' के तहत चरागाह ज़मीन को ग्राम वन घोषित करने के लिए ग्रामीणों की सहमति मांगी।
पेगू ने कहा कि इलाके को बचाने के लिए बोरडोलनी ग्राम पंचायत के तहत आने वाली लगभग 1,000 बीघा चरागाह ज़मीन को ग्राम वन में बदलने पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 'मगुवाहोला' नाम से ही पता चलता है कि वहाँ कोई वेटलैंड (आर्द्रभूमि) है और यह इलाका कई तरह के वन्यजीवों का घर है।
मेगामिक्स नेचर क्लब के देबोजित फुकन ने मगुवाहोला के पारिस्थितिक महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि आबादी बढ़ने और इंसानी दखल के बावजूद यहाँ प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के कुछ हिस्से बचे हुए हैं।
फुकन ने बताया कि मगुवाहोला 150 से ज़्यादा तरह के पक्षियों का घर है, जिनमें से आधे से ज़्यादा यहीं रहने वाले पक्षी हैं, जबकि लगभग 30 प्रजातियाँ प्रवासी हैं। उन्होंने कहा कि इस वेटलैंड में मछलियों की भी लगभग 30 से 40 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
इस प्रस्तावित ग्राम वन का मकसद इलाके के प्राकृतिक आवास और जैव-विविधता को बचाना और सुरक्षित रखना है।
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