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कैंसर इलाज में नई उम्मीद असम के वैज्ञानिकों ने बनाई स्मार्ट दवा

nidhi
22 Aug 2026 2:27 PM IST
कैंसर इलाज में नई उम्मीद असम के वैज्ञानिकों ने बनाई स्मार्ट दवा
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कैंसर मरीजों के लिए नई उम्मीद असम के वैज्ञानिकों का बड़ा शोध
गुवाहाटी: असम के वैज्ञानिकों ने कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एक नई 'स्मार्ट' कैंसर दवा विकसित की है। इस दवा को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह मुख्य रूप से कैंसर कोशिकाओं के अंदर सक्रिय हो और स्वस्थ कोशिकाओं को कम से कम नुकसान पहुंचाए।
इस नई दवा का नाम RK-251 बताया गया है। इसे इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IASST), गुवाहाटी और IIT गुवाहाटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर विकसित किया है। शोध का नेतृत्व डॉ. असीस बाला और डॉ. के.पी. भाबक की टीम ने किया।
कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर करेगी काम
पारंपरिक कीमोथेरेपी में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि दवा कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इससे मरीजों को कई साइड इफेक्ट्स का सामना करना पड़ता है।
RK-251 को इसी समस्या को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह दवा कैंसर कोशिकाओं में मौजूद एक खास जैविक स्थिति को पहचानकर सक्रिय होती है।
कैसे काम करती है RK-251?
वैज्ञानिकों के अनुसार, कई कैंसर कोशिकाओं में Reactive Oxygen Species (ROS) का स्तर सामान्य कोशिकाओं की तुलना में ज्यादा होता है। RK-251 इसी अंतर का फायदा उठाती है।
जब यह दवा कैंसर कोशिका के अंदर पहुंचती है तो अधिक ROS स्तर के कारण सक्रिय होकर NBDHEX नामक एंटी-कैंसर कंपाउंड रिलीज करती है। यह कंपाउंड कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने और इलाज से बचने में मदद करने वाले प्रोटीन को रोकने का काम करता है।
ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर पर दिखे बेहतर परिणाम
प्रारंभिक प्रयोगशाला परीक्षणों में RK-251 ने ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ प्रभावी गतिविधि दिखाई है। इस प्रकार का कैंसर इलाज के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसमें कई सामान्य टारगेटेड थेरेपी काम नहीं करतीं।
शोध में पाया गया कि दवा ने कैंसर कोशिकाओं पर ज्यादा प्रभाव दिखाया जबकि सामान्य कोशिकाओं पर इसका असर अपेक्षाकृत कम रहा।
कीमोथेरेपी का विकल्प बनने की उम्मीद
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की स्मार्ट दवाएं भविष्य में कैंसर इलाज को ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी बना सकती हैं। हालांकि, किसी भी नई दवा को मरीजों पर इस्तेमाल से पहले कई चरणों के क्लिनिकल ट्रायल से गुजरना पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, RK-251 जैसे शोध कैंसर उपचार को अधिक व्यक्तिगत और लक्ष्य आधारित बनाने की दिशा में अहम कदम हैं।
असम और भारत के लिए बड़ी उपलब्धि
यह उपलब्धि पूर्वोत्तर भारत में वैज्ञानिक शोध की बढ़ती क्षमता को भी दर्शाती है। IIT गुवाहाटी और IASST जैसे संस्थान लगातार स्वास्थ्य और तकनीक के क्षेत्र में नए प्रयोग कर रहे हैं।
अगर आगे के परीक्षण सफल रहते हैं तो यह स्मार्ट कैंसर दवा भविष्य में लाखों मरीजों के इलाज में नई उम्मीद बन सकती है।
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