Guwahati गुवाहाटी। असम सरकार के कैबिनेट मंत्री पियूष हजारिका ने गुरुवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए 2026 असम विधानसभा चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की। उन्होंने इस पूरे मामले को खेड़ा की जालसाजी करार दिया।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए हजारिका ने कहा कि लोगों को अदालत में हुई बहस का ट्रांसक्रिप्ट पढ़ना चाहिए, ताकि समझ सकें कि यह असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से ऐसे चुनाव को प्रभावित करने की साजिश थी, जिसे वह हारने जा रही थी।
उन्होंने दावा किया कि विपक्ष पहले भी ऐसी रणनीति अपना चुका है। उनके मुताबिक, 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान भी कथित तौर पर एडिटेड वीडियो वायरल किए गए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को लगा कि वही “टूलकिट” 2026 में असम में भी काम करेगी, लेकिन यह कोशिश कुछ ही घंटों में बेनकाब हो गई।
हजारिका ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ओर से अदालत में दिए गए तर्क विवादित दस्तावेजों की सत्यता पर आधारित नहीं थे। उनका आरोप है कि बचाव पक्ष ने मामले को राजनीतिक प्रतिशोध बताकर असली मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल सभी कथित साजिशकर्ताओं को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए और सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है, ताकि कोई भी राजनीतिक दल “फर्जीवाड़े और जालसाजी” के जरिए चुनाव जीतने की कोशिश न करे।
हजारिका की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। खेड़ा ने असम पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के संबंध में अग्रिम जमानत की मांग की है।
यह मामला मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा द्वारा गुवाहाटी क्राइम ब्रांच थाने में दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि खेड़ा ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उनके पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं और विदेशों में वित्तीय हित जुड़े हुए हैं।
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें चुनाव से जुड़े झूठे बयान, धोखाधड़ी, जालसाजी, सार्वजनिक रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल, अपमान और मानहानि जैसी धाराएं शामिल हैं।
इससे पहले खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख किया था, जहां उन्हें 10 अप्रैल को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद खेड़ा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि यह मामला सिर्फ मानहानि का नहीं है और दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
Tagsअसम राजनीतिपियूष हजारिकापवन खेड़ाकांग्रेसफर्जी दस्तावेजविधानसभा चुनाव 2026सुप्रीम कोर्टहिमंत बिस्वा सरमारिंकी भुइयां सरमाअग्रिम जमानतअसम न्यूजराजनीतिक विवादजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story





