
x
हथकरघा और हस्तशिल्प के करीब 40 प्रकार के उत्पाद
गुवाहाटी: भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का 'सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग', 21 से 28 अक्टूबर 2026 तक गुवाहाटी, असम के खानापारा स्थित 'फार्म गेट' पर 'शिल्प समागम मेला 2026' का आयोजन कर रहा है। इस मेले में पूर्वोत्तर राज्यों सहित पूरे देश के कारीगर एक साथ आएंगे और भारत की समृद्ध और विविध हस्तशिल्प तथा हथकरघा परंपराओं का प्रदर्शन करेंगे।
इस मेले में कुल 75 कारीगर (जिनमें 31 महिला कारीगर शामिल हैं) हिस्सा लेंगे और हथकरघा तथा हस्तशिल्प उत्पादों की लगभग 40 किस्में प्रदर्शित करेंगे। यह आयोजन कारीगरों को एक ऐसा मंच प्रदान करेगा, जहाँ वे अपने उत्पादों को सीधे आगंतुकों के सामने प्रदर्शित कर सकें, उनकी बिक्री कर सकें, संभावित ग्राहकों से जुड़ सकें और अपनी आजीविका को बढ़ाने के अवसर तलाश सकें।
इस मेले का उद्देश्य मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले तीन राष्ट्रीय निगमों—'राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम' (NSFDC), 'राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम' (NSKFDC) और 'राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम' (NBCFDC)—से जुड़े कारीगरों और लाभार्थियों को विपणन (मार्केटिंग) में सहायता प्रदान करना है।
'शिल्प समागम मेले' का आयोजन मंत्रालय के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिनका लक्ष्य अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों, सफाई कर्मचारियों और इन राष्ट्रीय निगमों से जुड़े अन्य लक्षित समूहों के कारीगरों के कौशल, उत्पादों और उद्यमशीलता की क्षमता को बढ़ावा देना है। बाजार तक पहुंच प्रदान करने के अलावा, ये मेले मंत्रालय और इसके तीन राष्ट्रीय निगमों की कल्याणकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता और विकास योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने का काम भी करते हैं।
गुवाहाटी में आयोजित होने वाले इस मेले में भारत के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी पारंपरिक शिल्प कलाओं और हथकरघा उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला देखने को मिलेगी। पूर्वोत्तर राज्यों और देश के अन्य हिस्सों से आए कारीगरों की भागीदारी, आगंतुकों को भारत की विविध कलात्मक परंपराओं, कारीगरी और सांस्कृतिक विरासत को जानने का अवसर देगी।
यह मेला 'भारत-ट्यूलिप' (BHARAT-TULIP - पारंपरिक कारीगरों के उत्थान और आजीविका कार्यक्रम) को भी बढ़ावा देगा। इस पहल का उद्देश्य लक्षित समूहों से जुड़े कारीगरों द्वारा बनाए गए उत्पादों को भौतिक दुकानों (फिजिकल आउटलेट्स) और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार में उपलब्ध कराने में मदद करना है। इस पहल का उद्देश्य बाज़ार से जुड़ाव को मज़बूत करना, ग्राहकों तक पहुँच बढ़ाना, आजीविका के अवसरों को बेहतर बनाना और पारंपरिक कला व शिल्प के संरक्षण में सहयोग देना है।
'शिल्प समागम मेला' जैसी पहलों के ज़रिए, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय लक्षित समुदायों को सशक्त बनाने पर लगातार ध्यान दे रहा है। इसके लिए बाज़ार तक पहुँच आसान बनाई जा रही है, उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है और टिकाऊ आजीविका के अवसरों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उम्मीद है कि इस मेले से इसमें भाग लेने वाले कारीगरों के उत्पादों को बेहतर पहचान मिलेगी, और साथ ही आने वाले लोगों को भारत की समृद्ध हस्तशिल्प और हथकरघा विरासत को सराहने और उसे समर्थन देने का अवसर मिलेगा।
Next Story





