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हाईकोर्ट के फैसले पर सबकी नजर
गुवाहाटी: गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मूल निवासियों और भूमि अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता प्रणब डोले की 'राष्ट्रीय सुरक्षा कानून' (NSA) के तहत की गई हिरासत को रद्द कर दिया। इससे 117 दिनों तक हिरासत में रहने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
उनके वकीलों में से एक, दीपेश अग्रवाल ने बताया कि एक डिविजन बेंच ने डोले की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश दिया। फैसले की कॉपी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
'ग्रेटर काजीरंगा भूमि और मानवाधिकार संरक्षण समिति' (GKLHRP) के संयोजक प्रणब डोले को 12 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। इससे कुछ दिन पहले ही उन्होंने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से सटे गांव 'इंगले पाथर' में प्रस्तावित एक लग्जरी 'हयात' होटल प्रोजेक्ट के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।
पुलिस का आरोप था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान डोले घातक हथियार लेकर 'टी ट्राइब्स म्यूजियम' (चाय जनजाति संग्रहालय) और पास ही चल रहे 'असम पर्यटन विकास निगम' (ATDC) के हयात प्रोजेक्ट वाली जगह में अवैध रूप से घुस गए थे।
गोलाघाट की एक सत्र अदालत ने 29 जुलाई को उन्हें जमानत दे दी थी। अदालत ने कहा था कि जांच अधिकारी पहले ही मुख्य गवाहों के बयान दर्ज कर चुके हैं और इस बात की कोई संभावना नहीं है कि डोले सबूतों को छिपाएंगे या उनसे छेड़छाड़ करेंगे।
हालांकि, जमानत आदेश के एक दिन बाद, 30 जुलाई को असम सरकार ने उन पर 'राष्ट्रीय सुरक्षा कानून' (NSA) लगा दिया, जिससे उनकी रिहाई नहीं हो सकी।
सरकार का आरोप था कि डोले 'विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम' (FCRA) का उल्लंघन करते हुए संदिग्ध विदेशी स्रोतों से होने वाले लेन-देन में शामिल थे।
'राष्ट्रीय सुरक्षा कानून' (NSA) के तहत, कानूनी सुरक्षा उपायों के अधीन रहते हुए, किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है।
डोले की गिरफ्तारी तब हुई थी, जब मूल निवासी समुदायों ने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल 'काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान' के पास प्रस्तावित पांच सितारा हयात होटल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। ये समुदाय पिछले चार वर्षों से इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे भूमि अधिकारों और लोगों की आजीविका पर बुरा असर पड़ सकता है।
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