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Assam में अवैध शराब के खिलाफ सरकार का बड़ा अभियान

Ratna Netam
26 Oct 2026 10:03 PM IST
Assam में अवैध शराब के खिलाफ सरकार का बड़ा अभियान
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गुवाहाटी : 26 अक्टूबर 2026। असम सरकार ने राज्य में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और तस्करी पर रोक लगाने के लिए आबकारी विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने 73 आबकारी अधिकारियों को 30 दिनों का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया है। इस पहल का उद्देश्य अधिकारियों को कानून प्रवर्तन, अवैध शराब की पहचान, जांच प्रक्रिया और आबकारी नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तैयार करना है।अवैध शराब के कारोबार पर नियंत्रण राज्य सरकार के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है। गैरकानूनी तरीके से तैयार की जाने वाली शराब न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। ऐसे में अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देकर निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
73 आबकारी अधिकारियों को मिला विशेष प्रशिक्षण
असम सरकार की इस पहल के अंतर्गत 73 आबकारी अधिकारियों को 30 दिनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किया गया। इसका उद्देश्य अधिकारियों की पेशेवर दक्षता बढ़ाना और उन्हें आबकारी कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तैयार करना है।प्रशिक्षण का महत्व इसलिए भी है क्योंकि आबकारी विभाग को अवैध शराब के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और बिक्री से संबंधित मामलों में कार्रवाई करनी होती है।अधिकारियों को कानून के प्रावधानों की जानकारी होने के साथ-साथ जांच, साक्ष्य संरक्षण और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय की समझ होना भी आवश्यक है।
अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने की तैयारी
असम में अवैध शराब के कारोबार को रोकने के लिए आबकारी विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में गैरकानूनी शराब निर्माण तथा बिक्री की गतिविधियों की निगरानी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई में केवल छापेमारी ही पर्याप्त नहीं होती। इसके लिए सूचना तंत्र को मजबूत बनाना, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करना भी जरूरी है।प्रशिक्षित अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने कार्यक्षेत्र में निगरानी को अधिक प्रभावी बनाएंगे और अवैध कारोबार से संबंधित मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
जहरीली शराब से लोगों की जान को खतरा
अवैध शराब के खिलाफ अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू जनस्वास्थ्य की सुरक्षा भी है। बिना उचित गुणवत्ता नियंत्रण के तैयार की गई शराब में हानिकारक रसायन मौजूद हो सकते हैं।विशेष रूप से मेथनॉल की मिलावट वाली शराब के सेवन से गंभीर विषाक्तता, आंखों की रोशनी जाने और मृत्यु तक का खतरा रहता है।असम में पहले भी जहरीली शराब से जुड़ी गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2019 में राज्य के गोलाघाट और जोरहाट जिलों में जहरीली शराब पीने से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।ऐसी घटनाएं बताती हैं कि अवैध शराब के निर्माण और वितरण पर प्रभावी नियंत्रण सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से कितना आवश्यक है।
आधुनिक जांच और कानूनी प्रक्रिया का महत्व
आबकारी विभाग के अधिकारियों के लिए जांच प्रक्रिया की जानकारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। अवैध शराब से संबंधित मामलों में नमूने एकत्र करना, उन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजना और साक्ष्यों का उचित रिकॉर्ड रखना आवश्यक है।इसके अलावा, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानूनी प्रावधानों का पालन करना भी जरूरी है, ताकि जांच में सामने आए तथ्य न्यायिक प्रक्रिया में उपयोग किए जा सकें।विशेष प्रशिक्षण से अधिकारियों को इन जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, प्रशिक्षण में शामिल विशिष्ट पाठ्यक्रमों और तकनीकी मॉड्यूल का विस्तृत आधिकारिक विवरण अभी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है।
पुलिस और आबकारी विभाग के बीच समन्वय जरूरी
अवैध शराब की तस्करी और बिक्री रोकने के लिए आबकारी विभाग के साथ पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन का सहयोग भी महत्वपूर्ण है।कई मामलों में अवैध शराब का परिवहन एक जिले से दूसरे जिले या राज्य की सीमाओं के पार किया जाता है। ऐसी गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान आवश्यक होता है।प्रशिक्षित अधिकारियों की तैनाती से जांच और निगरानी में बेहतर समन्वय की संभावना है।
अवैध शराब के खिलाफ अभियान को मिलेगी मजबूती
असम सरकार की इस पहल से आबकारी विभाग की प्रवर्तन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के प्रशिक्षण का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में अवैध शराब के मामलों की जांच,कार्रवाई और कानून के अनुपालन से आंका जा सकेगा।इसके साथ ही जनजागरूकता भी आवश्यक है, ताकि लोग अवैध और संदिग्ध शराब के सेवन से होने वाले खतरों को समझ सकें।73 अधिकारियों का 30 दिवसीय प्रशिक्षण राज्य में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ संस्थागत क्षमता मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।
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