असम

Kaziranga नेशनल पार्क में फिशिंग कैट की बड़ी मौजूदगी का खुलासा

Kavita2
6 May 2026 4:28 PM IST
Kaziranga नेशनल पार्क में फिशिंग कैट की बड़ी मौजूदगी का खुलासा
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Assam असम: असम के काज़ीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व में हुए पहले वैज्ञानिक सर्वे में फिशिंग कैट (प्रियोनैलुरस विवरिनस) की उल्लेखनीय मौजूदगी दर्ज की गई है। इस सर्वे में कुल 57 फिशिंग कैट रिकॉर्ड किए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि यह प्रजाति पार्क के फ्लडप्लेन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर फैली हुई है और यहां सक्रिय रूप से प्रजनन भी कर रही है।

यह अध्ययन फिशिंग कैट प्रोजेक्ट के सहयोग से काज़ीरंगा के टाइगर सेल द्वारा किया गया था। रिपोर्ट को 22 फरवरी को इंटरनेशनल फिशिंग कैट डे के अवसर पर जारी किया गया।

काज़ीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व की निदेशक सोनाली घोष ने बताया कि यह आंकड़ा बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि पार्क के मीठे पानी वाले फ्लडप्लेन फिशिंग कैट के लिए बेहद अनुकूल आवास (हैबिटैट) हैं। उन्होंने कहा कि यह रिज़र्व इस प्रजाति के लिए सबसे बेहतर प्राकृतिक आवासों में से एक साबित हो रहा है।

सर्वे में खास बात यह रही कि यह डेटा सीधे फिशिंग कैट पर नहीं, बल्कि टाइगर मॉनिटरिंग के लिए लगाए गए कैमरा ट्रैप्स से प्राप्त किया गया। इन कैमरा ट्रैप्स के जरिए मिले “बायकैच डेटा” का उपयोग करके फिशिंग कैट की मौजूदगी का आकलन किया गया।

अधिकारियों के अनुसार, काज़ीरंगा में विभिन्न प्रजातियों की व्यापक निगरानी करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। केवल फिशिंग कैट के लिए अलग से सर्वे करना लॉजिस्टिक और समय की दृष्टि से कठिन है, इसलिए मौजूदा कैमरा ट्रैप डेटा का विश्लेषण किया गया।

रिपोर्ट में बताया गया कि विश्लेषण के दौरान 14 लाख से अधिक कैमरा ट्रैप इमेज की जांच की गई। यह प्रक्रिया काफी जटिल थी, क्योंकि कई बार मौसम की स्थिति जैसे कोहरा या बारिश तस्वीरों की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। कई बार कैमरे के सामने जानवर पूरी तरह दिखाई नहीं देता, जिससे पहचान में कठिनाई आती है।

फिशिंग कैट प्रोजेक्ट की को-फाउंडर और वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट टियासा आध्या ने बताया कि डेटा विश्लेषण के दौरान कई तकनीकी चुनौतियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि मौसम और दृश्यता की समस्या के कारण कई बार स्पष्ट तस्वीरें नहीं मिल पातीं, जिससे पहचान प्रक्रिया प्रभावित होती है।

इस सर्वे के नतीजों ने यह संकेत दिया है कि काज़ीरंगा न केवल बाघों के लिए बल्कि फिशिंग कैट जैसी अन्य दुर्लभ प्रजातियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संरक्षण क्षेत्र है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डेटा भविष्य में संरक्षण नीतियों को और मजबूत बनाने में मदद करेगा।

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