
Assam असम: असम के जालुकबाड़ी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार बिदिशा नियोग ने जालुकबाड़ी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1 अप्रैल को मालीगांव-पांडू इलाके में उनके चुनावी काफिले पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने कई हमले किए।
नियोग ने अपनी शिकायत में कहा कि उनके चुनावी अभियान के लिए सभी ज़रूरी परमिशन पहले ही ली गई थीं। वह और उनकी टीम बोरझार से अज़ारा होते हुए मालीगांव जा रही थीं, लेकिन पांडू में उनका काफिला अचानक रोका गया। नियोग ने आरोप लगाया कि वहां BJP कार्यकर्ताओं का एक समूह सड़क किनारे एक टेम्पररी ऑफिस में मौजूद था, जिन्होंने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
कांग्रेस उम्मीदवार ने बताया कि इस दौरान उनके काफिले के लोगों के साथ गाली-गलौज की गई और धमकियां दी गईं। उन्होंने FIR में यह भी कहा कि इस हमले से न केवल उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ी बल्कि चुनाव प्रचार भी बाधित हुआ। नियोग का कहना है कि उनका अभियान शांतिपूर्ण और वैध था, और इस प्रकार की हिंसा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चुनौती है।
स्थानीय कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह घटना चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बनाने की एक कोशिश है। उन्होंने कहा कि चुनाव में हिंसा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पुलिस ने FIR दर्ज करने की पुष्टि की है और मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा कि CCTV फुटेज और काफिले में मौजूद गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी कार्यकर्ताओं की पहचान की जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान ऐसे विवाद अक्सर उम्मीदवारों के प्रचार पर असर डाल सकते हैं और मतदाताओं में असुरक्षा की भावना पैदा कर सकते हैं। जालुकबाड़ी में यह घटना स्थानीय चुनावी सरगर्मियों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
बिदिशा नियोग ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ़ चुनाव प्रचार करना है और वह किसी भी तरह की हिंसा का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से अपील की कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाए और चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाया जाए।
इस घटना ने राजनीतिक दलों के बीच भी तनाव बढ़ा दिया है। विपक्षी दलों ने इसे चुनावी हिंसा के रूप में देखा और भाजपा पर उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि उनके कार्यकर्ताओं पर लगाए गए आरोप निराधार हैं और जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी।
जालुकबाड़ी में 2026 के विधानसभा चुनाव में यह मामला उम्मीदवारों के सुरक्षा मुद्दे और चुनावी माहौल की संवेदनशीलता को उजागर करता है। चुनाव आयोग ने मामले की निगरानी करने और सुरक्षा उपाय बढ़ाने की बात कही है।
इस तरह, बिदिशा नियोग के काफिले पर हुए हमले की FIR दर्ज होने के बाद चुनावी प्रक्रिया और उम्मीदवारों की सुरक्षा पर गंभीर बहस शुरू हो गई है। मामले की जांच के नतीजे आने तक राजनीतिक हलचल और सुरक्षा चिंता बनी रहेगी।





