
Assam असम: असम के डिगबोई रिफाइनरी से जुड़े कैंटीन सप्लाई पेमेंट विवाद को लेकर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), असम ऑयल डिवीजन (AOD), डिगबोई रिफाइनरी और कैंटीन कॉन्ट्रैक्टर मेसर्स विद्या कैटरर्स ने अलग-अलग स्पष्टीकरण जारी किया है। यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय वेंडर्स ने कैंटीन को दी गई सप्लाई के भुगतान में देरी का आरोप लगाया।
स्थानीय सप्लायर्स ने दावा किया है कि रिफाइनरी कैंटीन को सप्लाई किए गए किराने का सामान, ताज़ी सब्जियां, मांस और पैकेज्ड पेयजल का भुगतान कई महीनों से लंबित है। वेंडर्स का कहना है कि भुगतान में देरी के कारण उनके व्यवसाय पर गंभीर वित्तीय दबाव पड़ रहा है और उनके दैनिक संचालन प्रभावित हो रहे हैं।
वेंडर्स ने यह भी कहा कि लंबे समय तक भुगतान रोके जाने से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है और कई छोटे सप्लायर्स के लिए व्यवसाय जारी रखना मुश्किल हो गया है। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में असंतोष भी देखा गया है।
वहीं दूसरी ओर, IOCL असम ऑयल डिवीजन डिगबोई के जनरल मैनेजर (ह्यूमन रिसोर्स) दीपांकर दास की ओर से जारी आधिकारिक बयान में स्थिति स्पष्ट की गई है। बयान में कहा गया है कि रिफाइनरी कैंटीन का संचालन मेसर्स विद्या कैटरर्स के माध्यम से एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत किया जाता है।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि कैंटीन संचालन से जुड़ी वस्तुओं की खरीद और वेंडर्स को भुगतान का निपटान कॉन्ट्रैक्टर द्वारा अनुबंध की शर्तों के अनुसार किया जाता है। IOCL ने यह भी संकेत दिया कि भुगतान प्रक्रिया में कंपनी की भूमिका सीधे तौर पर नहीं होती, बल्कि यह कॉन्ट्रैक्ट व्यवस्था के तहत कॉन्ट्रैक्टर की जिम्मेदारी है।
इस स्पष्टीकरण के बाद यह मामला प्रशासनिक और कॉन्ट्रैक्चुअल व्यवस्था के दायरे में आ गया है। फिलहाल स्थानीय वेंडर्स और कॉन्ट्रैक्टर के बीच भुगतान से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए आगे की बातचीत की संभावना जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, यह विवाद सप्लाई चेन और कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट से जुड़े सवालों को उजागर करता है, जिसमें सभी पक्षों की भूमिका और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्टता की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।





