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असम में ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की पहल

Ratna Netam
9 Oct 2026 9:08 PM IST
असम में ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की पहल
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गुवाहाटी। असम में ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य के पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत गोलाप बोरबोरा स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पंचायत एंड रूरल डेवलपमेंट (GBSIPRD) ने गुरुवार और शुक्रवार को दो दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों की अपनी आय यानी ओन सोर्स रेवेन्यू (Own Source Revenue) बढ़ाने और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के लिए एक प्रभावी रोडमैप तैयार करने पर चर्चा करना था।यह पहल केंद्र सरकार के राष्ट्रीय दृष्टिकोण **'विकसित पंचायत से विकसित भारत@2047'** के अनुरूप की गई है। इसके तहत पंचायतों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने की व्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीण विकास की जरूरतों को अधिक प्रभावी तरीके से पूरा करने के लिए व्यापक ढांचा विकसित करने पर जोर दिया गया।कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में असम के पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अरूप शर्मा (ACS) ने भाग लिया। उन्होंने कार्यक्रम में आयोजित संवादात्मक चर्चाओं में भी हिस्सा लिया।
ग्राम पंचायतों की आय बढ़ाने पर विशेष चर्चा
दो दिवसीय कार्यशाला का प्रमुख विषय ग्राम पंचायतों की स्वयं की आय बढ़ाना रहा।पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय विकास योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन संस्थाओं की वित्तीय क्षमता मजबूत होने से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं बनाने और उन्हें लागू करने में मदद मिल सकती है।ग्राम पंचायतों की अपनी आय से आशय उन वित्तीय संसाधनों से है, जिन्हें पंचायतें लागू कानूनों और नियमों के अनुसार स्थानीय स्तर पर जुटा सकती हैं।कार्यशाला में इसी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और पंचायतों की वित्तीय निर्भरता कम करने के लिए रोडमैप पर चर्चा की गई।इस पहल का उद्देश्य पंचायतों को लंबे समय तक आर्थिक रूप से सक्षम बनाए रखने की दिशा में काम करना है।
विकसित भारत 2047 के विजन से जुड़ी पहल
असम सरकार की यह पहल 'विकसित पंचायत से विकसित भारत@2047' के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है।इस दृष्टिकोण में ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की मजबूती को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।पंचायतों को वित्तीय रूप से सक्षम बनाने से ग्रामीण समुदायों की आवश्यकताओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर तरीके से समझने और उनके समाधान के लिए संसाधन उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में गांवों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।इसी संदर्भ में ग्राम पंचायतों की आर्थिक क्षमता को मजबूत करने की जरूरत पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
पंचायतों की वित्तीय क्षमता मजबूत करने का लक्ष्य
कार्यशाला में पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय क्षमता बढ़ाने के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करने की आवश्यकता पर चर्चा की गईस्थानीय स्वशासन संस्थाओं के सामने विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय विषय होता है।कई विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायतों को विभिन्न सरकारी अनुदानों और सहायता पर निर्भर रहना पड़ता है।ऐसी स्थिति में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वैध राजस्व स्रोतों का बेहतर उपयोग पंचायतों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने में सहायक हो सकता है।हालांकि, कार्यशाला में किसी विशेष कर, शुल्क या नए राजस्व प्रावधान को लागू करने का निर्णय लिए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संभावित उपायों और वित्तीय सुदृढ़ीकरण के रोडमैप पर विचार-विमर्श करना था।
स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने की प्रक्रिया पर जोर
कार्यशाला के दौरान पंचायतों के लिए स्थानीय संसाधन जुटाने की व्यवस्था को मजबूत बनाने का विषय प्रमुखता से शामिल रहा।ग्राम पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने के लिए स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों को समझना आवश्यक होता है।पंचायतों की राजस्व क्षमता उनके क्षेत्र, आर्थिक गतिविधियों और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।ऐसे में वित्तीय योजना बनाते समय स्थानीय जरूरतों और प्रशासनिक क्षमता को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।कार्यशाला का उद्देश्य एक ऐसा व्यापक ढांचा तैयार करने पर चर्चा करना था, जो ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से अधिक टिकाऊ बनाने में सहायक हो सके।इस प्रक्रिया में संसाधनों की पहचान, वित्तीय प्रबंधन और राजस्व संग्रह की प्रभावशीलता जैसे विषय प्रासंगिक हैं।
उद्घाटन सत्र में शामिल हुए सचिव अरूप शर्मा
असम के पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अरूप शर्मा (ACS) ने दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में भाग लिया।उन्होंने कार्यक्रम के दौरान आयोजित संवादात्मक चर्चाओं में भी हिस्सा लिया।वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की भागीदारी से पंचायतों के वित्तीय सुदृढ़ीकरण से जुड़े विषयों पर विभागीय स्तर पर विचार-विमर्श का अवसर मिलाहालांकि, उपलब्ध जानकारी में अरूप शर्मा के संबोधन का विस्तृत विवरण या उनके द्वारा की गई किसी विशेष घोषणा का उल्लेख नहीं किया गया है।कार्यशाला में चर्चा का केंद्र ग्राम पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में रोडमैप विकसित करना रहा।
ग्रामीण विकास योजनाओं को मिलेगी मजबूती
ग्राम पंचायतों की वित्तीय स्थिति मजबूत होने से ग्रामीण विकास की योजनाओं के संचालन में सहायता मिल सकती है।गांवों में स्वच्छता, सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव, स्थानीय बुनियादी ढांचे और अन्य सामुदायिक जरूरतों से जुड़े कार्यों में पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।यदि पंचायतों के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हों, तो वे स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुरूप विकास कार्यों की योजना बनाने में अधिक सक्षम हो सकती हैं।इसके साथ ही पंचायतों की वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता भी महत्वपूर्ण होती है।राजस्व बढ़ाने के प्रयासों के साथ प्राप्त धन के उचित उपयोग और लेखांकन की व्यवस्था मजबूत करना भी आवश्यक है।
आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए दीर्घकालिक योजना
कार्यशाला का एक प्रमुख उद्देश्य ग्राम पंचायतों को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने की दिशा में दीर्घकालिक सोच विकसित करना था।वित्तीय आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल राजस्व संग्रह बढ़ाना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी और जिम्मेदार उपयोग करना भी है।पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय योजना, प्रशासनिक क्षमता और स्थानीय आवश्यकताओं के बीच संतुलन जरूरी होता है।असम में आयोजित इस कार्यशाला के माध्यम से इन्हीं विषयों पर चर्चा की गई।हालांकि, कार्यशाला के बाद तैयार होने वाले अंतिम रोडमैप, उसके क्रियान्वयन की समयसीमा और निर्धारित राजस्व लक्ष्यों का विवरण अभी उपलब्ध नहीं है।
पंचायतों को सशक्त बनाने की दिशा में कदम
असम के पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत आयोजित यह दो दिवसीय कार्यशाला ग्राम पंचायतों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है।गोलाप बोरबोरा स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पंचायत एंड रूरल डेवलपमेंट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय राजस्व जुटाने, वित्तीय आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए व्यापक ढांचा तैयार करने पर विचार किया गया।विकसित पंचायत से विकसित भारत@2047' के लक्ष्य के अनुरूप आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत और टिकाऊ बनाना है।** पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने की दिशा में तैयार होने वाला रोडमैप भविष्य में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की वित्तीय क्षमता मजबूत करने का आधार बन सकता है।
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