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भारत के FTAs से बढ़ा निर्यात का दायरा, असम को प्लांटेशन और कृषि क्षेत्र में बड़ा लाभ

Kavita2
10 Jun 2026 5:06 PM IST
भारत के FTAs से बढ़ा निर्यात का दायरा, असम को प्लांटेशन और कृषि क्षेत्र में बड़ा लाभ
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Assam असम: भारत के बढ़ते फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) नेटवर्क से देश के निर्यातकों के लिए नए अवसरों के दरवाजे खुल रहे हैं, और इस प्रक्रिया में असम एक प्रमुख लाभार्थी के रूप में उभर रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार, राज्य के मजबूत प्लांटेशन, कृषि और वन-आधारित उत्पाद क्षेत्र इसकी इस बढ़त का मुख्य आधार हैं।

कॉमर्स मिनिस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारी और कॉमर्स डिपार्टमेंट में जॉइंट सेक्रेटरी कपिल चौधरी ने मंगलवार को गुवाहाटी में आयोजित एक आउटरीच कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी। यह कार्यक्रम केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था, जिसमें भारत की व्यापार नीति और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम के दौरान कपिल चौधरी ने कहा कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स भारत की एक्सपोर्ट ग्रोथ को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन समझौतों से भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिल रही है, जिससे देश का निर्यात लगातार बढ़ रहा है।

आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भारत का कुल निर्यात वर्ष 2014-15 में लगभग 468 बिलियन डॉलर था, जो बढ़कर 2025-26 में 863 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने इस वृद्धि का श्रेय नीति सुधारों, व्यापार सुगमता में सुधार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ मजबूत जुड़ाव को दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में किए गए कई महत्वपूर्ण व्यापार समझौते, जैसे भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और भारत-ऑस्ट्रेलिया इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट (ECTA), ने कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और प्लांटेशन उत्पादों जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोले हैं।

विशेष रूप से असम जैसे राज्यों के लिए यह समझौते महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं, क्योंकि यहां चाय, बांस, लकड़ी आधारित उत्पाद और अन्य कृषि-वन उत्पादों की मजबूत उपलब्धता है। अधिकारियों के अनुसार, इन क्षेत्रों के उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने से स्थानीय किसानों और उद्यमियों को सीधा लाभ मिल रहा है।

कपिल चौधरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल निर्यात बढ़ाना ही नहीं, बल्कि इसे अधिक समावेशी बनाना भी है ताकि छोटे और मध्यम स्तर के उत्पादक भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन सकें। उन्होंने यह भी बताया कि व्यापार सुविधाओं को आसान बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं।

आउटरीच कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने भी माना कि एफटीए नेटवर्क भारत की आर्थिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, जिससे न केवल बड़े उद्योग बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाएं भी मजबूत हो रही हैं।

अंत में अधिकारियों ने कहा कि आने वाले समय में भारत और अधिक देशों के साथ व्यापार समझौते कर निर्यात बाजार को और व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे असम जैसे राज्यों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।

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