असम

वर्ल्ड राइनो डे पर हिमंत सरमा ने कांग्रेस पर उठाए सवाल

Ratna Netam
22 Sept 2026 9:06 PM IST
वर्ल्ड राइनो डे पर हिमंत सरमा ने कांग्रेस पर उठाए सवाल
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गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को ‘वर्ल्ड राइनो डे’ के मौके पर राज्य में गैंडों के संरक्षण को लेकर अपनी सरकार के कामकाज का उल्लेख करते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार की ठोस कार्रवाई और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों से काजीरंगा नेशनल पार्क में गैंडों के अवैध शिकार को शून्य तक लाने में सफलता मिली है।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक वीडियो संदेश में हाथ से ‘जीरो’ का इशारा करते हुए अपनी सरकार के वन्यजीव संरक्षण रिकॉर्ड को सामने रखा। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में गैंडों के अवैध शिकार की घटनाओं को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि कांग्रेस काल में हर साल “40 से 45 गैंडे” मारे जाने का आंकड़ा मुख्यमंत्री का राजनीतिक दावा है; उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों में इस पूरे कालखंड के लिए ऐसा एकसमान वार्षिक आंकड़ा इस रूप में नहीं मिलता। इसलिए इसे सरमा के बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
जीरो’ का इशारा कर दिया संदेश
विश्व गैंडा दिवस हर साल 22 सितंबर को मनाया जाता है। इसी अवसर पर हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि गैंडों की सुरक्षा के मामले में असम ने बड़ा बदलाव देखा है।सरमा ने कहा कि वह ‘जीरो’ का इशारा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनकी सरकार ने गैंडों के अवैध शिकार को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले गैंडों के शिकार के कारण असम की छवि प्रभावित होती थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं।मुख्यमंत्री का बयान ऐसे समय आया है जब एक सींग वाला गैंडा असम की पहचान और राज्य की वन्यजीव संरक्षण नीति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना
सरमा ने अपने संदेश में पिछली कांग्रेस सरकार की वन्यजीव संरक्षण नीति की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में गैंडों के शिकार की घटनाएं बड़ी संख्या में होती थीं और इन्हें रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।उन्होंने दावा किया कि उस दौर में हर साल 40 से 45 गैंडों तक को मार दिया जाता था। मुख्यमंत्री के अनुसार इन घटनाओं की वजह से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असम की बदनामी होती थी।यह मुख्यमंत्री द्वारा कांग्रेस के रिकॉर्ड को लेकर किया गया दावा है। गैंडा संरक्षण के आंकड़ों का आकलन अलग-अलग वर्षों और संरक्षित क्षेत्रों के आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना जरूरी है।
मौजूदा सरकार ने अपनाई ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
असम सरकार पहले भी गैंडों के अवैध शिकार को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति की बात करती रही है। सितंबर 2021 में राज्य सरकार ने विश्व गैंडा दिवस पर 2,479 गैंडे के सींगों को नष्ट किया था। सरकार ने कहा था कि इसका उद्देश्य गैंडे के सींगों के कथित औषधीय महत्व से जुड़ी धारणाओं को तोड़ना और अवैध शिकार तथा तस्करी के खिलाफ कड़ा संदेश देना है।उस समय मुख्यमंत्री सरमा ने कहा था कि वन्यजीवों के अवैध शिकार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने गैंडों के संरक्षण के साथ उनके आवास और काजीरंगा क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही पर भी जोर दिया था।
असम में बढ़ी गैंडों की आबादी
असम सरकार के वन विभाग के उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1999 में राज्य में गैंडों की कुल संख्या 1,672 थी। इनमें 1,552 गैंडे अकेले काजीरंगा नेशनल पार्क में थे।2006 में असम में इनकी संख्या बढ़कर 2,006 और 2009 में 2,201 हो गई। 2012 में कुल संख्या 2,505 दर्ज की गई। 2018 की गणना में काजीरंगा में 2,413, मानस में 36, ओरांग में 101 और पोबितोरा में 102 गैंडे दर्ज किए गए थे। इस तरह राज्य में कुल संख्या 2,652 तक पहुंच गई थी।ये आंकड़े बताते हैं कि गैंडा संरक्षण की प्रक्रिया कई वर्षों से चली आ रही है और इसमें विभिन्न सरकारों, वन विभाग के कर्मचारियों, स्थानीय समुदायों और संरक्षण संगठनों की भूमिका रही है।
काजीरंगा गैंडा संरक्षण का प्रमुख केंद्र
काजीरंगा नेशनल पार्क दुनिया में एक सींग वाले गैंडों के सबसे महत्वपूर्ण आवासों में शामिल है। असम वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार काजीरंगा और इसके विभिन्न अतिरिक्त क्षेत्रों का कुल अधिसूचित क्षेत्र करीब 889.51 वर्ग किलोमीटर है।गैंडों के अलावा यह इलाका बाघ, हाथी, जंगली भैंसे और कई दूसरी वन्यजीव प्रजातियों का भी महत्वपूर्ण आवास है। इसलिए यहां गैंडों की सुरक्षा के साथ पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण भी जरूरी माना जाता है।भारत में एक सींग वाले गैंडे मुख्य रूप से असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के संरक्षित क्षेत्रों में पाए जाते हैं। हाल के वर्षों में देश में गैंडों की संख्या बढ़ी है और 2024 तक इनकी संख्या 4,000 से ऊपर पहुंचने की रिपोर्ट है।
शिकार रोकने के लिए निगरानी पर जोर
गैंडों के अवैध शिकार का मुख्य कारण उनके सींगों की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में मांग रही है। इसी वजह से काजीरंगा सहित अन्य संरक्षित क्षेत्रों में निगरानी, खुफिया तंत्र और वन विभाग की गश्त महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।वन्यजीव अपराधों को रोकने के लिए केवल संरक्षित क्षेत्र के अंदर निगरानी पर्याप्त नहीं होती। तस्करी नेटवर्क की पहचान, सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता और दूसरे राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय भी जरूरी होता है।असम सरकार लगातार दावा करती रही है कि सख्त कानून प्रवर्तन और सुरक्षा व्यवस्था ने गैंडों के शिकार को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संरक्षण के सामने अभी भी कई चुनौतियां
गैंडों के लिए केवल अवैध शिकार ही खतरा नहीं है। उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण भी बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञ घास के मैदानों, आर्द्रभूमि और वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित रखने को गैंडा संरक्षण के लिए जरूरी बताते हैं।काजीरंगा ब्रह्मपुत्र के बाढ़ क्षेत्र में स्थित है। यहां बाढ़ प्राकृतिक पारिस्थितिकी का हिस्सा है, लेकिन गंभीर बाढ़ के दौरान वन्यजीव ऊंचे इलाकों की ओर जाते हैं। ऐसे समय सुरक्षित कॉरिडोर और वाहनों की गति पर नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
विश्व गैंडा दिवस पर सियासी संदेश भी
हिमंत बिस्वा सरमा ने विश्व गैंडा दिवस के मौके पर जहां अपनी सरकार के संरक्षण प्रयासों को उपलब्धि के रूप में पेश किया, वहीं पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के रिकॉर्ड को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठाए।गैंडा संरक्षण पर राजनीतिक दावों से अलग आधिकारिक आंकड़े यह दिखाते हैं कि असम में एक सींग वाले गैंडे की आबादी ने पिछले कई दशकों में वृद्धि दर्ज की है। इस संरक्षण यात्रा में सुरक्षा व्यवस्था के साथ आवास संरक्षण, वनकर्मियों की भूमिका और स्थानीय समुदायों का सहयोग महत्वपूर्ण रहा है।मुख्यमंत्री के ताजा बयान ने विश्व गैंडा दिवस पर एक बार फिर काजीरंगा और असम के गैंडा संरक्षण मॉडल को चर्चा में ला दिया है। आने वाले समय में चुनौती इस उपलब्धि को बरकरार रखने के साथ गैंडों के आवास और पूरे वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने की होगी।
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