असम

भाजपा की जीत पर हिमंत सरमा का बड़ा बयान, राहुल गांधी को दी नसीहत

Ratna Netam
4 Nov 2026 7:22 PM IST
भाजपा की जीत पर हिमंत सरमा का बड़ा बयान, राहुल गांधी को दी नसीहत
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पूर्णिया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस की ओर से लगातार लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीतने के लिए जनता का विश्वास हासिल करती है। सरमा ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और भाजपा के प्रति लोगों का समर्थन कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने राहुल गांधी को भाजपा के संगठन और कार्यशैली को समझने की नसीहत भी दी।बुधवार, 4 नवंबर को बिहार के पूर्णिया में भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा के दौरान हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनावों में हार के बाद कांग्रेस लगातार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर सवाल उठाती रही है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक कमजोरियों की समीक्षा करने के बजाय चुनावी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।सरमा ने कहा कि राहुल गांधी बार-बार वोट चोरी का मुद्दा उठाते हैं, जबकि भाजपा जनता का दिल जीतने में सफल हो रही है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी के प्रति लोगों का भरोसा ही भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने दावा किया कि जब तक जनता का समर्थन प्रधानमंत्री मोदी के साथ बना रहेगा, तब तक कांग्रेस का वोट चोरी संबंधी अभियान राजनीतिक रूप से प्रभावी नहीं होगा।
मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को भाजपा के कामकाज और संगठन की कार्यप्रणाली को समझने की सलाह दी। उनका कहना था कि किसी राजनीतिक दल की सफलता केवल चुनाव प्रचार तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसके पीछे कार्यकर्ताओं की मेहनत, जनता से निरंतर संपर्क और संगठन की मजबूत भूमिका होती है। भाजपा के जनसंपर्क मॉडल को लेकर उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस को अपनी चुनावी रणनीति पर दोबारा विचार करने की जरूरत है।हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी की लगातार चुनावी हार का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को यह समझना चाहिए कि मतदाताओं का समर्थन हासिल करने के लिए केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी को चुनावी असफलताओं से सबक लेने की नसीहत दी। सरमा ने दावा किया कि देश के मतदाता भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भरोसा जता रहे हैं।असम के मुख्यमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर, समान नागरिक संहिता और अनुच्छेद 370 हटाने जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए भी राहुल गांधी को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस नेतृत्व इन विषयों पर जनता की भावनाओं को किस तरह समझता है। सरमा ने दावा किया कि भाजपा ने सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर अपने रुख के माध्यम से व्यापक जनसमर्थन हासिल किया है। हालांकि, ये सरमा के राजनीतिक दावे हैं और इन्हें सभी मतदाताओं की राय के रूप में नहीं देखा जा सकता।
मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की संसदीय सदस्यता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका तर्क था कि यदि कांग्रेस को चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति है, तो उसे यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि उसी व्यवस्था के माध्यम से निर्वाचित उसके नेताओं की जीत को वह किस आधार पर स्वीकार करती है।दरअसल, कांग्रेस और भाजपा के बीच चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा है। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं तथा चुनाव संचालन से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक हार की प्रतिक्रिया बता रही है।मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण भी दोनों दलों के बीच विवाद का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। विपक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम हटने की आशंका पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। वहीं भाजपा का पक्ष है कि मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। किसी भी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाने का निर्णय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और पात्रता के आधार पर ही होना चाहिए।
इससे पहले एक नवंबर को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भी हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर इसी मुद्दे को लेकर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस उन ईवीएम पर सवाल उठा रही है, जिनके माध्यम से हुए चुनावों में उसे हिमाचल प्रदेश में सत्ता मिली थी। सरमा ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस चुनाव जीतने पर व्यवस्था को स्वीकार करती है और हारने के बाद उसी व्यवस्था पर सवाल उठाने लगती है।बिहार में आयोजित पदयात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा के पक्ष में लोगों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को पार्टी की चुनावी सफलताओं का प्रमुख कारण बताया। उनके मुताबिक, भाजपा का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता के साथ दीर्घकालिक विश्वास का रिश्ता बनाना है।राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से देखें तो भाजपा और कांग्रेस के बीच यह बयानबाजी केवल चुनावी नतीजों तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में मतदाता सूची की पारदर्शिता, चुनाव आयोग की भूमिका, राजनीतिक जवाबदेही और जनता का विश्वास जैसे महत्वपूर्ण सवाल भी हैं। ऐसे में दोनों दल अपने-अपने तर्कों के जरिए जनता के बीच राजनीतिक समर्थन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।फिलहाल, हिमंत बिस्वा सरमा के ताजा बयान ने राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ भाजपा के राजनीतिक हमलों को और तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस बयान पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है। इसके साथ ही चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर राजनीतिक बहस आगे क्या मोड़ लेती है, इस पर भी सबकी नजर बनी हुई है।
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