
गुवाहाटी : असम में NEET परीक्षा से जुड़े कथित विवाद को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस के बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने लोगों से अपील की है कि वे राज्य के मंत्री केशव महंता को निशाना न बनाएं और न ही उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल करें। यह बयान उस समय आया है, जब मंत्री की बेटी दिबिसा महंता कथित तौर पर NEET परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल दिखाई दीं।
सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया। इन वीडियो में दिबिसा महंता को केंद्र सरकार और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ नारे लगाते हुए देखा गया। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगीं और राजनीतिक दलों के बीच भी बयानबाजी तेज हो गई।
विरोध प्रदर्शन के दौरान दिबिसा महंता ने NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाई थी। उन्होंने कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े किए और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करने वाले प्रदर्शन में भाग लिया। इसके बाद कुछ लोगों ने उनके परिवार और मंत्री केशव महंता को लेकर भी टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं।
इस पूरे विवाद पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की राजनीतिक सोच और उसके व्यक्तिगत विचारों के लिए उसके माता-पिता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मंत्री केशव महंता को उनकी बेटी के विचारों या गतिविधियों के आधार पर निशाना न बनाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर वयस्क नागरिक को अपने विचार रखने और अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है। यदि कोई व्यक्ति किसी मुद्दे पर अपनी अलग सोच रखता है या किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होता है, तो इसके लिए उसके परिवार के सदस्यों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
सरमा ने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत हमलों में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने लोगों से संयम बरतने और सोशल मीडिया पर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अनावश्यक टिप्पणी करने से बचने की अपील की।
NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्रों और युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा था।
दिबिसा महंता के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद असम की राजनीति में भी इस मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक विरोधाभास के रूप में देखा, जबकि कुछ ने इसे एक युवा नागरिक के अपने विचार व्यक्त करने के अधिकार से जोड़कर देखा।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान को इसी विवाद को शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति के विचारों और गतिविधियों का मूल्यांकन उसी आधार पर किया जाना चाहिए, न कि उसके पारिवारिक संबंधों के आधार पर।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया के दौर में सार्वजनिक व्यक्तियों और उनके परिवारों से जुड़े मुद्दे तेजी से राजनीतिक बहस का हिस्सा बन जाते हैं। ऐसे मामलों में नेताओं और उनके परिवारों को व्यक्तिगत टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री का बयान इसी तरह की परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखने की अपील के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं, विपक्षी दलों और छात्र संगठनों की ओर से NEET विवाद को लेकर सरकार पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना और छात्रों के हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
दूसरी ओर, सरकार की ओर से भी इस तरह के मामलों की जांच और आवश्यक कदम उठाने की बात कही जाती रही है। NEET जैसे बड़े स्तर की परीक्षाओं में लाखों छात्र शामिल होते हैं, इसलिए किसी भी तरह की अनियमितता छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल दिबिसा महंता से जुड़े वीडियो को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने साफ कर दिया है कि किसी युवा के राजनीतिक विचारों या गतिविधियों के लिए उसके माता-पिता को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे इस मामले को व्यक्तिगत हमले का मुद्दा न बनाएं और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करें।





