असम

गुवाहाटी हाई कोर्ट का सख्त रुख: महिला को ₹2 लाख का हर्जाना देने के निर्देश

Tara Tandi
7 Sept 2026 5:25 PM IST
गुवाहाटी हाई कोर्ट का सख्त रुख: महिला को ₹2 लाख का हर्जाना देने के निर्देश
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गुवाहाटी: गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम सरकार को मुमताज़ बेगम को 2 लाख रुपये का अंतरिम मुआवज़ा देने का निर्देश दिया है। बंगाली मूल की मुस्लिम महिला बेगम को बांग्लादेश भेज दिया गया था, जबकि उन्हें फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के उस आदेश को चुनौती देने का मौका नहीं दिया गया था जिसमें उन्हें विदेशी नागरिक घोषित किया गया था।
जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस सुष्मिता फुकन खाउंड की डिवीज़न बेंच ने बेगम के परिवार की ओर से दायर 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। परिवार को तब पता चला कि उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया है, जब वे याचिका लेकर हाई कोर्ट पहुंचे।
कोर्ट ने नागांव फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल द्वारा बेगम के मामले को संभालने के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि रिकॉर्ड से ट्रिब्यूनल की ओर से "कानूनी दुर्भावना" (malice in law) स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
ट्रिब्यूनल ने 30 मई को बेगम को विदेशी घोषित कर दिया था, जब वह हाई कोर्ट के पहले के आदेश के बाद अपने मामले पर पुनर्विचार के लिए वहां पेश हुई थीं। हाई कोर्ट ने पहले पाया था कि ट्रिब्यूनल ने उनके द्वारा पेश किए गए सभी सबूतों पर विचार नहीं किया था।
बेंच ने गौर किया कि बेगम को 30 मई के आदेश के बारे में सूचित नहीं किया गया था और उसके तुरंत बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे उन्हें फैसले को चुनौती देने का मौका नहीं मिला। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी के समय और परिस्थितियों के बारे में ट्रिब्यूनल जज और पुलिस द्वारा दिए गए बयानों पर भी सवाल उठाए।
कोर्ट ने माना कि अपनाई गई प्रक्रिया विदेशी नागरिक घोषित किए गए लोगों को देश से बाहर भेजने के लिए तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का "सीधा उल्लंघन" थी। इस प्रक्रिया के तहत, किसी व्यक्ति को देश से बाहर भेजने से पहले उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने का मौका दिया जाना चाहिए।
बेंच ने कहा कि सरकारी तंत्र ने बेगम को ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट जाने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने से रोका। इसलिए, कोर्ट ने असम सरकार को उन्हें अंतरिम मुआवज़े के तौर पर 2 लाख रुपये देने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने गृह और राजनीतिक विभाग को उस तारीख और समय की जांच करने का भी निर्देश दिया जब ट्रिब्यूनल का 30 मई का आदेश तैयार किया गया था। कोर्ट ने कहा कि अगर ज़रूरी हो, तो यह पता लगाने के लिए ट्रिब्यूनल सदस्य का कंप्यूटर ज़ब्त किया जा सकता है कि राय कब लिखी गई थी।
बेंच ने ज़िला पुलिस अधीक्षकों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि विदेशी नागरिक घोषित किए गए लोगों को हिरासत में लेने से पहले ट्रिब्यूनल के आदेशों के बारे में सूचित किया जाए। व्यक्ति को ज़िले से बाहर ले जाने से पहले परिवार के किसी वयस्क सदस्य को भी सूचित किया जाना चाहिए।
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