
Assam असम: असम के सांस्कृतिक जगत में चर्चित और संवेदनशील मामले में हाई प्रोफाइल आरोपी सिद्धार्थ शर्मा की ज़मानत याचिका पर गुवाहाटी हाई कोर्ट 4 जून को सुनवाई करेगा। यह मामला मशहूर असमिया कलाकार ज़ुबीन गर्ग की कथित मौत से जुड़ा है और पूरे राज्य में लोगों का ध्यान खींच चुका है।
सूत्रों के अनुसार, ज़मानत याचिका जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की बेंच के समक्ष लिस्ट की गई है। सिद्धार्थ शर्मा, जो ज़ुबीन गर्ग के पूर्व मैनेजर रह चुके हैं, ने यह याचिका हाई कोर्ट में इसलिए दायर की है क्योंकि फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने पहले उनकी ज़मानत अर्जी को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता और चल रही जांच का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया था।
शर्मा इस मामले में मुख्य आरोपियों में से एक हैं। उनका नाम इस उच्च-प्रोफ़ाइल केस में शामिल होने के कारण लगातार मीडिया और आम जनता के ध्यान में रहा है। उनकी ज़मानत याचिका पर होने वाली सुनवाई पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।
इस घटनाक्रम से पहले ही गुवाहाटी हाई कोर्ट ने नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल (NEIF) के आयोजक श्यामकानु महंता की ज़मानत याचिका खारिज की थी। महंता भी इस मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल हैं और उनकी फास्ट-ट्रैक कोर्ट द्वारा खारिज की गई ज़मानत अर्जी ने इस मामले की संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया था।
सिद्धार्थ शर्मा के मामले की सुनवाई को लेकर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाई कोर्ट का निर्णय आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है। हाई कोर्ट में ज़मानत मिलना या ना मिलना दोनों ही स्थिति में मामले की दिशा बदल सकती है।
हालांकि इस समय पुलिस और जांच एजेंसियां मामले की गहनता और जाँच में लगी हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले में सबूतों और गवाहों की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है, और हाई कोर्ट की सुनवाई इसी संदर्भ में अत्यंत अहम मानी जा रही है।
इस मामले ने असम के सांस्कृतिक जगत और आम जनता में गहरा असर डाला है। ज़ुबीन गर्ग की कथित मौत और इसके आसपास उठते सवालों ने राज्य में मीडिया और सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया। ऐसे में हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ी है।
सिद्धार्थ शर्मा के वकील का कहना है कि हाई कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेज़ और तर्क उनके पक्ष में मजबूत हैं। उनका कहना है कि फ़ास्ट-ट्रैक कोर्ट के निर्णय को चुनौती देते हुए यह याचिका न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जाँच एजेंसियों और अदालत दोनों की निगाह इस केस पर बनी हुई है। 4 जून की सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि उच्च न्यायालय इस संवेदनशील मामले में कैसे रुख अपनाता है और आरोपी की ज़मानत याचिका को लेकर क्या निर्णय लेता है।
इस तरह, गुवाहाटी हाई कोर्ट में सिद्धार्थ शर्मा की ज़मानत याचिका की सुनवाई राज्य और कानूनी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखी जा रही है।





