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Assam असम: असम के तिनसुकिया जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण Dibru-Saikhowa National Park के विस्तृत घास के मैदान जलमग्न हो गए हैं। पानी भरने से प्राकृतिक चरागाह प्रभावित हुए हैं, जिसके चलते यहां के प्रसिद्ध जंगली घोड़े अपने सामान्य आवास से बाहर निकलने को मजबूर हो गए हैं।
25 अप्रैल को इन घोड़ों का एक जोड़ा National Highway 37 पर देखा गया, जहां वे भोजन की तलाश में भटकते नजर आए। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाढ़ के कारण घास के मैदान अस्थायी रूप से पानी से भर गए हैं, जिससे घोड़ों के लिए चारा उपलब्ध नहीं रह गया है।
डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान अपनी अनोखी जैव विविधता और विशेष रूप से जंगली घोड़ों की आबादी के लिए जाना जाता है। यह भारत का एकमात्र ऐसा क्षेत्र माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में ये घोड़े स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं। वर्ष 1999 में इसे राष्ट्रीय उद्यान के रूप में अधिसूचित किया गया था और इसे बायोस्फीयर रिजर्व का दर्जा भी प्राप्त है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यहां के जंगली घोड़े ऐतिहासिक महत्व रखते हैं। माना जाता है कि इनका संबंध 1940 के दशक से है, जब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश और सहयोगी सेनाओं द्वारा उपयोग किए गए घोड़ों को इस क्षेत्र में छोड़ दिया गया था। समय के साथ इन घोड़ों ने जंगली जीवन अपना लिया और अब यह एक स्थायी आबादी के रूप में विकसित हो चुके हैं।
ये घोड़े आमतौर पर 3 से 15 के छोटे समूहों में रहते हैं और घास तथा अन्य वनस्पतियों पर निर्भर रहते हैं। ब्रह्मपुत्र नदी के बाढ़ चक्र के साथ तालमेल बिठाते हुए ये अपनी जीवनशैली को ढालने में सक्षम रहे हैं। हालांकि, लगातार और अधिक बारिश के कारण इस बार की स्थिति उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो गई है।
स्थानीय संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि इन घोड़ों में कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने की अद्भुत क्षमता है। एक कंज़र्वेशनिस्ट ने बताया कि यह झुंड न केवल प्राकृतिक अनुकूलन का उदाहरण है, बल्कि इतिहास से जुड़ी एक जीवित विरासत भी है।
प्रशासन और वन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल घोड़ों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और वे किसी खतरे में न पड़ें, खासकर जब वे सड़कों के पास दिखाई दे रहे हैं।
इस बीच, पर्यावरण विशेषज्ञों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वन्यजीवों के लिए वैकल्पिक भोजन और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका मानना है कि बदलते मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण वन्यजीवों के व्यवहार में बदलाव देखा जा रहा है, जिसके लिए सतर्कता जरूरी है।
फिलहाल, जंगली घोड़ों का हाईवे पर आना स्थानीय लोगों और प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और जलस्तर के आधार पर उनके आवास की स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
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