असम

पुलिस भर्ती में अग्निवीरों को मिलेगा 12 प्रतिशत आरक्षण

Ratna Netam
4 Oct 2026 8:46 PM IST
पुलिस भर्ती में अग्निवीरों को मिलेगा 12 प्रतिशत आरक्षण
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गुवाहाटी। असम की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाने और पूर्व अग्निवीरों को सरकारी सेवाओं से जोड़ने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में रविवार को हुई असम कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें अग्निपथ योजना के तहत सशस्त्र बलों में सेवा करने वाले असम के स्थायी निवासियों के लिए विभिन्न सरकारी विभागों की भर्ती में 12 प्रतिशत पद आरक्षित करने का फैसला प्रमुख है।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, असम पुलिस, कमांडो बटालियन, जेल विभाग, फायर सर्विस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल यानी SDRF, फॉरेस्ट गार्ड और आबकारी विभाग में कॉन्स्टेबल तथा इसके समकक्ष पदों की भर्ती में 12 प्रतिशत पद अग्निवीर के रूप में सेवा कर चुके असम के स्थायी निवासियों के लिए आरक्षित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य सशस्त्र बलों में चार साल की सेवा के दौरान प्रशिक्षण और अनुभव हासिल करने वाले युवाओं को राज्य में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
अग्निपथ योजना के तहत सशस्त्र बलों में भर्ती होने वाले युवाओं को ‘अग्निवीर’ कहा जाता है। यह योजना युवाओं को चार साल की अवधि के लिए सशस्त्र बलों में सेवा करने का अवसर प्रदान करती है। इस दौरान उन्हें सैन्य प्रशिक्षण, अनुशासन और विभिन्न परिस्थितियों में काम करने का अनुभव मिलता है।
असम सरकार का नया फैसला ऐसे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो अग्निवीर के रूप में अपनी सेवा पूरी करने के बाद रोजगार के नए विकल्प तलाशेंगे। पुलिस, कमांडो बटालियन, जेल, फायर सर्विस, SDRF, वन और आबकारी जैसे विभागों में काम करने के लिए अनुशासन, शारीरिक दक्षता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने की क्षमता की आवश्यकता होती है। अग्निवीरों को अपनी सेवा के दौरान मिले अनुभव का उपयोग इन क्षेत्रों में किया जा सकेगा।
कैबिनेट की विज्ञप्ति के अनुसार, अग्निपथ योजना का उद्देश्य देशभक्त और प्रेरित युवाओं को सशस्त्र बलों में सेवा का अवसर देना है। योजना के जरिए ऐसे युवा प्रतिभाओं को वर्दी पहनने और देश की सेवा करने का मौका मिलता है, जो मौजूदा तकनीकी बदलावों और आधुनिक जरूरतों से परिचित हैं।
विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि अग्निपथ योजना से चार साल की सेवा के बाद समाज को कुशल, अनुशासित और प्रेरित मानव संसाधन मिलेगा। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा सरकारी भर्ती में आरक्षण देने का फैसला इन युवाओं के अनुभव और प्रशिक्षण को आगे भी उपयोग में लाने की दिशा में एक कदम है।
असम कैबिनेट के फैसले में खास तौर पर उन अग्निवीरों को लाभ देने की बात कही गई है जो असम के स्थायी निवासी हैं। यानी आरक्षण का लाभ राज्य के पात्र पूर्व अग्निवीरों को निर्धारित नियमों और भर्ती प्रक्रिया के तहत मिलेगा।
असम पुलिस में कॉन्स्टेबल पद राज्य की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी तरह कमांडो बटालियन में सुरक्षा संबंधी विशेष जिम्मेदारियां होती हैं। जेल विभाग में सुरक्षा और प्रशासन, फायर सर्विस में आपात परिस्थितियों से निपटना और SDRF में प्राकृतिक आपदाओं एवं अन्य संकटों के दौरान राहत और बचाव कार्य प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं।
फॉरेस्ट गार्ड राज्य के वन क्षेत्रों और वन्यजीव संसाधनों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जबकि आबकारी विभाग में भी प्रवर्तन से जुड़ी जिम्मेदारियां होती हैं। इन सभी सेवाओं में अग्निवीरों के लिए आरक्षण का प्रावधान उनके सैन्य प्रशिक्षण और अनुशासन को सरकारी सेवा में उपयोग करने का अवसर दे सकता है।
असम सरकार ने इस फैसले को रोजगार और विकास की व्यापक नीति से जोड़ा है। कैबिनेट बैठक में ग्रोथ, रोजगार और विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई प्रस्तावों पर विचार किया गया। इनमें अग्निवीरों के लिए आरक्षण का फैसला युवाओं के रोजगार से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
चार साल तक सशस्त्र बलों में सेवा करने के बाद अग्निवीरों के सामने भविष्य के रोजगार को लेकर सवाल महत्वपूर्ण रहता है। राज्य सरकार का यह फैसला उनके लिए सरकारी सेवाओं में एक अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में देखा जा रहा है। हालांकि संबंधित पदों पर भर्ती के लिए निर्धारित योग्यता, चयन प्रक्रिया और अन्य नियम लागू रहेंगे।
इस फैसले से उन युवाओं को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है जो अग्निपथ योजना के जरिए सशस्त्र बलों में सेवा करने की तैयारी कर रहे हैं। सेवा पूरी होने के बाद राज्य के विभिन्न विभागों में अवसर मिलने से उनके पास भविष्य के लिए रोजगार का एक और विकल्प मौजूद रहेगा।
अग्निपथ योजना को युवाओं की सशस्त्र बलों में भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। योजना के तहत चुने गए अग्निवीरों को सैन्य जीवन और प्रशिक्षण का अनुभव मिलता है। सरकार का मानना है कि सेवा पूरी करने के बाद ये युवा अपने प्रशिक्षण, कौशल और अनुशासन का इस्तेमाल दूसरे क्षेत्रों में भी कर सकते हैं।
असम कैबिनेट का 12 प्रतिशत आरक्षण का फैसला इसी सोच को राज्य स्तर पर आगे बढ़ाता है। इससे सैन्य सेवा का अनुभव रखने वाले युवाओं को पुलिस और अन्य वर्दीधारी सेवाओं में प्रवेश का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए इस फैसले के बाद अब इसके क्रियान्वयन से जुड़े विस्तृत नियम संबंधित विभागों की भर्ती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होंगे। अलग-अलग विभागों में निकलने वाली भर्तियों में पात्र अग्निवीरों को निर्धारित आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।
कुल मिलाकर असम सरकार ने अग्निवीरों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकारी भर्ती में 12 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने का फैसला किया है। पुलिस से लेकर SDRF, फायर सर्विस, वन और आबकारी विभाग तक कई सेवाओं को इसके दायरे में रखा गया है। सरकार के अनुसार, इससे प्रशिक्षित और अनुशासित युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ राज्य के विभिन्न विभागों को भी अनुभवी मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा।
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