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ASSAM असम: सिलचर स्थित असम यूनिवर्सिटी के पारिस्थितिकी और पर्यावरण विज्ञान विभाग में प्रसिद्ध संरक्षण वैज्ञानिक और आरण्यक के महासचिव डॉ. बिभाब कुमार तालुकदार ने “ग्लोबल और लोकल परिप्रेक्ष्य में वर्तमान वन्यजीव संरक्षण की तस्वीर” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने जैव विविधता संरक्षण में सरकारी सहयोग और जन-जागरूकता की अहमियत पर जोर दिया और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 और 51(ए)(जी) में वर्णित पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अधिकार और कर्तव्यों का उल्लेख किया। उन्होंने आरण्यक के प्रोजेक्ट्स जैसे Wildlife Genetics Lab और GIS व रिमोट सेंसिंग लैब के योगदान की जानकारी दी, जो विलुप्तप्राय प्रजातियों और भूमि उपयोग परिवर्तन के अध्ययन में सहायक रहे हैं।
6 सितंबर को काछार कॉलेज में “वन्यजीव संरक्षण में छात्रों और शोधकर्ताओं के अवसर” पर आयोजित व्याख्यान में डॉ. तालुकदार ने कहा कि बराक वैली का विशिष्ट परिदृश्य अनुसंधान के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करता है। उन्होंने छात्रों को शोध और इंटर्नशिप कार्यक्रमों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी बीच, इंटरनेशनल वल्चर अवेयरनेस डे पर आरण्यक, बीएनएचएस और रानी हाई स्कूल के सहयोग से रानी मार्केट में गिद्ध संरक्षण पर नुक्कड़ नाटक आयोजित किया गया। छात्रों ने गिद्धों की घटती संख्या और ज़हरखोरी से होने वाले खतरों पर जोरदार प्रस्तुति दी। इस मौके पर डॉ. तालुकदार ने कहा,
“गिद्ध पारिस्थितिकी संतुलन के लिए बेहद जरूरी हैं। उनकी मौजूदगी स्वस्थ पर्यावरण का संकेत है। आरण्यक की शोधकर्ता काकली बैश्य और वसीमा बेगम ने सामूहिक प्रयासों से संरक्षण की अपील की। कार्यक्रम में बीएनएचएस के अधिकारी, शिक्षक और स्थानीय लोग शामिल हुए। यह पहल छात्रों, शोधकर्ताओं और समुदाय को संरक्षण प्रयासों में सक्रिय करने की दिशा में आरण्यक की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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