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Guwahati गुवाहाटी। दिवाली के शुभ अवसर पर असम की राजधानी गुवाहाटी में घर-घर और गलियों में दीयों की रोशनी ने शहर को जगमगाया। स्थानीय नागरिकों ने पारंपरिक तरीके से मिट्टी के दीयों और रंगीन लाइटों से अपने घरों, मोहल्लों और बाजारों को सजाया, जिससे शहर में उत्सव का माहौल चरम पर पहुंच गया। शहर के प्रमुख इलाकों जैसे पट्टी बाजार, पाटसाला रोड, कामाख्या मार्ग और जोरहाट रोड में स्थानीय लोग रात भर दीप जलाकर और रंगोली बनाकर त्योहार का आनंद ले रहे थे। बच्चों और युवाओं ने भी हल्की फुलझड़ियों और पटाखों के साथ दिवाली की खुशी में भाग लिया।
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि इस वर्ष गुवाहाटी में सुरक्षा और स्वच्छता को विशेष महत्व दिया गया। पुलिस और अग्निशमन विभाग ने बाजारों और भीड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त गश्त की ताकि कोई दुर्घटना या अव्यवस्था न हो। नगर निगम ने शहर के सार्वजनिक स्थानों और मंदिरों को भी सजाया, जहां नागरिकों ने सामूहिक रूप से दीयों की आरती की। स्थानीय निवासी सुनिता शर्मा ने बताया, “हम हर साल दिवाली बड़े उत्साह और परंपरा के अनुसार मनाते हैं। बच्चों और परिवार के साथ दीयों की सजावट करना और रंगोली बनाना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। इस बार दीपोत्सव का आनंद पहले से कहीं ज्यादा है।”
गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर, श्रीराम मंदिर और अन्य स्थानीय मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन किया गया। पुजारियों ने देवी-देवताओं की आराधना के साथ लोगों को पूजा विधियों और त्योहार के धार्मिक महत्व के बारे में जानकारी दी। मंदिरों में भीड़भाड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थित प्रवेश के लिए विशेष इंतजाम किए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में असम की लोक कला, नृत्य और संगीत प्रस्तुतियां शामिल थीं। बच्चों के लिए दीयों की सजावट और रंगोली बनाने की कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जिससे उनका त्योहार में उत्साह और बढ़ गया।
स्थानीय व्यापारियों ने भी इस मौके पर विशेष ऑफर और प्रदर्शनी लगाई, जिसमें दीयों, मूर्तियों, सजावटी वस्तुओं और मिठाइयों की बिक्री की गई। व्यापारी बताते हैं कि इस बार बिक्री पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रही, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहन मिला। गुवाहाटी नगर निगम के अधिकारी ने कहा कि शहर में दिवाली का यह उत्सव सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे स्वच्छता बनाए रखें, सुरक्षित रूप से पटाखे चलाएं और त्योहार का आनंद मिलजुल कर लें। शहरवासियों ने कहा कि इस साल की दिवाली विशेष थी क्योंकि महामारी के बाद पहली बार लोग बिना किसी चिंता के मिलकर दीपोत्सव का जश्न मना रहे हैं। दीयों की रोशनी, रंग-बिरंगी सजावट और सामूहिक उत्सव ने गुवाहाटी को दिवाली के रंग में रंग दिया।
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