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तेंदुए के दो बच्चों को बचाया
Dibrugarh (Assam): पूर्वी असम के डिब्रूगढ़ ज़िले में मंगलवार सुबह ग्रीनवुड टी एस्टेट के भीतर उस समय हड़कंप मच गया, जब स्थानीय लोगों ने चाय बागान इलाके में एक नाले के अंदर तेंदुए के दो बच्चों को पड़ा हुआ देखा। तुरंत सतर्कता दिखाते हुए बागान के लोगों ने इस बारे में चाय बागान के मैनेजर को सूचना दी, जिसके बाद वन विभाग को अवगत कराया गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और दोनों तेंदुए के बच्चों को सुरक्षित रूप से अपनी कस्टडी में ले लिया।
डिब्रूगढ़ के एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने घटना की जानकारी देते हुए बताया,
“सुबह करीब 10.30 बजे हमें ग्रीनवुड टी एस्टेट के मैनेजर से फोन आया कि चाय बागान के अंदर दो तेंदुए के बच्चे मिले हैं। सूचना मिलते ही हमारी टीम तुरंत मौके पर पहुंची और दोनों बच्चों को सुरक्षित अपनी कस्टडी में ले लिया। शुरुआती जांच में दोनों की सेहत ठीक पाई गई है।”
अधिकारी के अनुसार, चाय बागान के मैनेजर ने बताया कि तेंदुए के दोनों बच्चे बागान के अंदर एक नाले में पड़े हुए थे। वहां काम कर रहे मजदूरों और स्थानीय लोगों ने जब उन्हें देखा, तो पहले डर जरूर लगा, लेकिन उन्होंने समझदारी दिखाते हुए बच्चों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया और तुरंत अधिकारियों को जानकारी दी। वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला।
वन अधिकारी ने बताया कि दोनों तेंदुए के बच्चे लगभग ढाई महीने के हैं और संभवत: उनकी मां तेंदुआ उन्हें कुछ समय के लिए छोड़कर शिकार की तलाश में गई हुई थी।
उन्होंने कहा,
“अक्सर ऐसा होता है कि मां तेंदुआ अपने बच्चों को कुछ घंटों या कभी-कभी उससे भी ज्यादा समय के लिए अकेला छोड़कर खाने की तलाश में चली जाती है। इसका यह मतलब नहीं होता कि उसने बच्चों को छोड़ दिया है।”
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में लोगों को घबराने की जरूरत नहीं होती। कई बार जानकारी के अभाव और डर की वजह से लोग तेंदुए के बच्चों को नुकसान पहुंचा देते हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गैरकानूनी है।
उन्होंने कहा,
“कई मामलों में हमने देखा है कि डर या गलतफहमी के कारण लोग तेंदुए के बच्चों को मार देते हैं। लेकिन इस मामले में स्थानीय लोगों ने जिम्मेदारी दिखाई, जिसकी वजह से हम समय पर बच्चों को सुरक्षित अपने कब्जे में ले पाए।”
वन विभाग ने बताया कि दोनों बच्चों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। फिलहाल उन्हें कुछ समय के लिए सुरक्षित निगरानी में रखा गया है।
अधिकारी ने आगे कहा,
“शाम के समय हम दोनों बच्चों को उसी जगह पर वापस छोड़ देंगे, जहां से उन्हें बरामद किया गया था, ताकि उनकी मां उन्हें फिर से अपने साथ ले जा सके। यह प्रक्रिया पूरी सावधानी और निगरानी में की जाएगी।”
स्थानीय निवासियों के अनुसार, तेंदुओं का चाय बागानों में दिखना कोई नई बात नहीं है। एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया,
“हमने सुबह बच्चों को चाय बागान के अंदर नाले में देखा। उस वक्त मां तेंदुआ वहां नहीं थी। हमने बिना देर किए बागान मैनेजर को सूचना दी। हमारे इलाके में तेंदुए अक्सर चाय बागानों के अंदर दिखाई देते हैं, इसलिए यह हमारे लिए पूरी तरह से असामान्य नहीं है।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि तेंदुए आमतौर पर दिन के समय चाय बागानों और जंगल से सटे इलाकों में छिपे रहते हैं, जबकि रात के समय वे भोजन की तलाश में आसपास की मानव बस्तियों की ओर बढ़ जाते हैं।
एक निवासी ने कहा,
“रात के वक्त तेंदुए अकसर इंसानी बस्तियों के पास आ जाते हैं। वे मवेशियों या आवारा जानवरों का शिकार करते हैं। चाय बागानों में उनकी मौजूदगी यहां काफी आम है।”
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चाय बागानों और जंगलों से सटे इलाकों में मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके पीछे जंगलों का सिकुड़ना, भोजन की कमी और मानव बस्तियों का तेजी से विस्तार मुख्य कारण हैं। ऐसे में लोगों का जागरूक और संवेदनशील होना बेहद जरूरी है।
अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि अगर कहीं भी तेंदुए या अन्य जंगली जानवरों के बच्चे दिखाई दें, तो उन्हें छूने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें और तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
उन्होंने कहा,
“वन्यजीवों की सुरक्षा में आम लोगों की भूमिका बेहद अहम है। सही समय पर दी गई सूचना कई जिंदगियों को बचा सकती है।”
इस घटना को वन विभाग और स्थानीय लोगों के बीच बेहतर तालमेल और जागरूकता का एक सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है। तेंदुए के दोनों बच्चों को सुरक्षित बचा लेना और उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने की तैयारी इस बात का संकेत है कि सही जानकारी और सहयोग से मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व को बेहतर बनाया जा सकता है।
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