
Assam असम: असम के धुबरी ज़िले में जलवायु संकट और लगातार हो रहे जलभराव का असर अब आम जीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि हाईवे, बाईपास और ग्रामीण सड़कों के कई हिस्से किसानों द्वारा धान सुखाने के अस्थायी मैदानों में बदल दिए गए हैं।
नदी-तटीय इस क्षेत्र में किसान लगातार अनिश्चित मौसम और जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। खेतों में पानी भरा रहने के कारण फसल कटने के बाद भी अनाज को सुखाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में किसानों को राष्ट्रीय राजमार्गों और गांव की सड़कों पर धान फैलाकर सुखाना पड़ रहा है।
मंगलवार सुबह धुबरी पुलिस ने इस स्थिति को देखते हुए एक एडवाइजरी जारी की और लोगों से अपील की कि वे सड़कों पर फसलें न सुखाएं। पुलिस ने चेतावनी दी कि इससे न केवल सड़क सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है, बल्कि वाहनों और फसलों दोनों को नुकसान होने की संभावना भी बढ़ जाती है।
पिछले कुछ दिनों में कई प्रमुख सड़कों पर धान फैले होने के कारण यातायात बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं। इससे स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और आवागमन प्रभावित हो रहा है।
हालांकि, यह स्थिति पूरी तरह नई नहीं है, क्योंकि बाढ़ संभावित पश्चिमी असम के कई हिस्सों में फसल कटाई के मौसम में इस तरह की समस्या पहले भी देखी जाती रही है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इस वर्ष यह समस्या पहले से कहीं अधिक गंभीर हो गई है।
किसानों के अनुसार, निचले इलाकों की जमीनें लंबे समय तक जलमग्न रहती हैं, जिससे पारंपरिक सुखाने की जगहें उपयोग में नहीं आ पातीं। इसके अलावा, घरों के आसपास खुली जगह की कमी भी एक बड़ी समस्या है, जिसके चलते अनाज को सुरक्षित रूप से सुखाना मुश्किल हो जाता है।
इस स्थिति ने किसानों की मजबूरी और प्रशासनिक चुनौतियों दोनों को उजागर किया है। फिलहाल प्रशासन द्वारा लोगों से नियमों का पालन करने की अपील की जा रही है, जबकि किसान वैकल्पिक समाधान की मांग कर रहे हैं।





