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Assam असम: असम के बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (BTR) में जंगल की जमीन पर कब्ज़े को लेकर संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। बोडोलैंड जनजाति सुरक्षा मंच (BJSM) और ऑल असम ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन (AATSU) ने इस मुद्दे पर बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) और राज्य सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सोमवार को कोकराझार में दोनों संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने BTC के फॉरेस्ट विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक और काउंसिल हेड ऑफ डिपार्टमेंट सुमन महापात्रा को एक ज्ञापन सौंपा। यह प्रतिनिधिमंडल BJSM के अध्यक्ष दाओरादेखरेब नरजारी के नेतृत्व में पहुंचा था।
ज्ञापन में संगठनों ने आरोप लगाया कि BTR के विभिन्न इलाकों में जंगल की जमीन पर अवैध कब्ज़ा बढ़ रहा है और इसमें कुछ लोगों के माओवादी विचारधारा से जुड़े होने की आशंका जताई गई है। संगठनों का कहना है कि यह स्थिति क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है।
ज्ञापन सौंपने के बाद नरजारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इलाके में कुछ समूहों की गतिविधियां संदिग्ध हैं और वे जंगल की जमीन पर कब्ज़ा करने के साथ-साथ अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों को समय रहते रोकना जरूरी है।
उन्होंने रूनीखाता और कोकराझार के कुछ हिस्सों में हाल ही में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने स्थानीय लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है। उनके अनुसार, यदि इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
BJSM और AATSU ने BTC प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों से पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अवैध कब्ज़े में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
संगठनों ने यह भी कहा कि जंगल की जमीन पर कब्ज़ा न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है, बल्कि इससे स्थानीय समुदायों के अधिकार भी प्रभावित होते हैं। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
अधिकारियों की ओर से अभी तक इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन ज्ञापन मिलने के बाद जांच और कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
यह मुद्दा क्षेत्र में सुरक्षा और प्रशासनिक सतर्कता से जुड़ा हुआ है। संगठनों ने उम्मीद जताई है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से लेंगी और जल्द ही उचित कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल, BTR में जंगल कब्ज़े और उससे जुड़े आरोपों को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है और आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।
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