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असम में बाढ़ पीड़ितों के लिए 10 लाख मुआवजे की मांग

Ratna Netam
8 Oct 2026 6:52 PM IST
असम में बाढ़ पीड़ितों के लिए 10 लाख मुआवजे की मांग
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गुवाहाटी। असम में बाढ़ से प्रभावित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा और राहत राशि उपलब्ध कराने की मांग को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। रायजोर दल के अध्यक्ष और शिवसागर विधानसभा क्षेत्र से विधायक अखिल गोगोई ने गुरुवार, 8 अक्टूबर को राज्य सरकार से बाढ़ के कारण भारी नुकसान झेलने वाले प्रत्येक प्रभावित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग दोहराई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार बाढ़ पीड़ितों को उचित आर्थिक सहायता नहीं देती, तब तक उनका अनिश्चितकालीन सत्याग्रह जारी रहेगा। गोगोई ने दावा किया कि प्रभावित परिवारों को राहत दिलाने के लिए पूरे असम में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
अखिल गोगोई ने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग उठ रही है। उन्होंने बताया कि गुवाहाटी में पहले ही सात विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं और तीन अन्य प्रदर्शन आयोजित किए जाने हैं। गोगोई ने कहा कि इन प्रदर्शनों का उद्देश्य सरकार का ध्यान प्रभावित लोगों की परेशानियों की ओर आकर्षित करना है।गोगोई ने कहा, "आज पूरे असम में बाढ़ और तबाही से प्रभावित लोगों के लिए उचित मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। गुवाहाटी में पहले ही सात प्रदर्शन हो चुके हैं और तीन और प्रदर्शन होने हैं।"
रायजोर दल के विधायक ने कहा कि बाढ़ के कारण अनेक परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से घोषित आर्थिक सहायता सभी पात्र परिवारों तक समय पर नहीं पहुंच पाई है। इसके कारण बाढ़ पीड़ितों में नाराजगी बनी हुई है।अखिल गोगोई ने 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर असम विधानसभा परिसर में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू किया था। उनका धरना गुरुवार को सातवें दिन में प्रवेश कर गया। गोगोई ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगें पूरी होने तक यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
गोगोई ने विशेष रूप से शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों के बाढ़ प्रभावित परिवारों का मुद्दा उठाया है। इन चार जिलों में बाढ़ से घरों, कृषि भूमि और आजीविका के साधनों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। उनका कहना है कि जिन परिवारों को गंभीर नुकसान हुआ है, उन्हें पर्याप्त मुआवजा मिलना चाहिए।रायजोर दल की प्रमुख मांगों में प्रभावित परिवारों को 10 लाख रुपये की सहायता देने के अलावा पहले घोषित राहत राशि का तत्काल भुगतान भी शामिल है। गोगोई ने मांग की है कि चार प्रभावित जिलों के पात्र परिवारों को घोषित 15 हजार रुपये की अंतरिम सहायता जल्द उपलब्ध कराई जाए। इसके अतिरिक्त शिवसागर और चराइदेव के प्रभावित परिवारों के लिए घोषित 10 हजार रुपये की विशेष सहायता का भुगतान भी सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने दावा किया कि कुछ प्रभावित परिवारों को अब तक पूरी राहत राशि नहीं मिली है। हालांकि, कितने परिवारों को सहायता मिल चुकी है और कितने परिवार भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, इसका अंतिम सत्यापित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।इस बीच रायजोर दल के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को गुवाहाटी में असम सचिवालय और मंत्रियों के आवासों के आसपास विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारी बाढ़ पीड़ितों को जल्द राहत देने और मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग कर रहे थे।
रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी कार्यकर्ता सुबह से अलग-अलग समूहों में सचिवालय के आसपास पहुंचे। कई स्थानों पर करीब 50 से 100 प्रदर्शनकारियों के समूह एकत्र हुए। सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका और कई कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में लिया।प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर वहां से हटाया। रायजोर दल के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बाढ़ के ढाई महीने से अधिक समय बाद भी प्रभावित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी है।अखिल गोगोई ने इस आंदोलन को केवल राजनीतिक विरोध के बजाय बाढ़ पीड़ितों के अधिकारों से जुड़ा संघर्ष बताया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को उनके नुकसान के अनुरूप सहायता मिलनी चाहिए और सरकार को इस संबंध में स्पष्ट समयसीमा तय करनी चाहिए।
गोगोई ने सरकार के सामने अन्य मांगें भी रखी हैं। इनमें बाढ़ प्रभावित जरूरतमंद परिवारों को ओरुनोदोई योजना से जोड़ना, सहायता राशि बढ़ाना और क्षतिग्रस्त सार्वजनिक सुविधाओं का पुनर्निर्माण शामिल है। उन्होंने स्कूलों, सड़कों, तटबंधों और धार्मिक स्थलों सहित बाढ़ से प्रभावित बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए भी पर्याप्त धन उपलब्ध कराने की मांग की है।इसके अलावा गोगोई ने बाढ़ के कारणों की सीबीआई जांच कराने की मांग भी की है। उनका कहना है कि व्यापक तबाही के कारणों की जांच होनी चाहिए, ताकि प्रभावित लोगों को न्याय और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए आवश्यक कदम सुनिश्चित किए जा सकें।
दूसरी ओर, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और अखिल गोगोई के बीच राहत वितरण के मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं। मुख्यमंत्री ने हाल ही में बाढ़ पीड़ितों की आर्थिक सहायता में देरी को लेकर गोगोई के आंदोलन और राजनीतिक श्रेय लेने के मुद्दे पर टिप्पणी की थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़ गए।गोगोई ने मुख्यमंत्री से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर प्रभावित लोगों को राहत उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी निर्वाचित विधायक द्वारा जनता की समस्याएं उठाना उसका दायित्व है और सरकार को उन समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए।
असम में बाढ़ के कारण उत्पन्न संकट केवल मकानों और संपत्तियों के नुकसान तक सीमित नहीं है। कृषि भूमि, आजीविका के साधन और स्थानीय बुनियादी ढांचा प्रभावित होने से परिवारों को लंबे समय तक आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में समय पर राहत और पुनर्वास से जुड़ी योजनाओं का महत्व बढ़ जाता है।फिलहाल अखिल गोगोई ने साफ कर दिया है कि वह मुआवजे की मांग पूरी होने तक अपना सत्याग्रह समाप्त नहीं करेंगे। रायजोर दल के कार्यकर्ता भी विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं।
गुरुवार को गुवाहाटी में हुए प्रदर्शनों के बाद असम सरकार पर बाढ़ प्रभावित परिवारों की सहायता से जुड़ी मांगों का जवाब देने का दबाव बढ़ा है। हालांकि, प्रत्येक प्रभावित परिवार को 10 लाख रुपये देने की मांग पर सरकार की ओर से किसी नई स्वीकृति की पुष्टि नहीं हुई है।अखिल गोगोई का कहना है कि जब तक प्रभावित परिवारों को घोषित राहत राशि और उचित मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में असम में बाढ़ राहत, पुनर्वास और मुआवजे का मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
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