
Assam असम: असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को विधानसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी ने ही सबसे पहले 1925 में UCC की वकालत की थी, लेकिन अब वही इसका विरोध कर रही है।
मुख्यमंत्री ने ‘द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, 2026 बिल’ पर चर्चा के दौरान कहा कि प्रस्तावित कानून संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना पर आधारित है और इसका संबंध किसी राजनीतिक विचारधारा या संगठन से नहीं है। उन्होंने विपक्षी दलों के इस आरोप को खारिज किया कि यह विधेयक किसी विशेष संगठन की सोच से प्रेरित है।
सरमा ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड की मांग भारत में नई नहीं है, बल्कि इसका इतिहास काफी पुराना है। उन्होंने दावा किया कि 1925 में कांग्रेस ने सबसे पहले इसकी वकालत की थी और बाद में 1937 में जवाहरलाल नेहरू ने भी इस विचार को आगे बढ़ाया था।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब अपने पुराने रुख से अलग हो गई है और UCC का विरोध धार्मिक आधार पर कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी का रुख अब सेक्युलर मूल्यों से हटकर किसी विशेष समुदाय की ओर झुकता दिखाई देता है।
सरमा ने सदन में कहा, “आज वही कांग्रेस UCC का विरोध कर रही है, जो कभी इसकी समर्थक थी। अब वह इसे धार्मिक दृष्टिकोण से देख रही है, जबकि यह कानून सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज में समानता लाना और अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों से उत्पन्न जटिलताओं को खत्म करना है। UCC का आधार संविधान के अनुच्छेद 44 में दिया गया है, जो राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लेकर चिंता जताई है, जबकि सरकार का दावा है कि यह कानून सामाजिक न्याय और समानता को मजबूत करेगा।
फिलहाल असम में इस मुद्दे पर राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है और दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। UCC बिल पर आगे की चर्चा आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है।





