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हाथी ट्रांसफर पर विवाद: असम के 53 समूहों ने उठाई जांच की मांग

Tara Tandi
7 Oct 2026 5:46 PM IST
हाथी ट्रांसफर पर विवाद: असम के 53 समूहों ने उठाई जांच की मांग
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गुवाहाटी: 53 पशु कल्याण, वन्यजीव और संरक्षण संगठनों के एक समूह ने तमिलनाडु सरकार से असम से राज्य के मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में लाए गए पांच युवा हाथियों के अधिग्रहण और ट्रांसफर की जांच करने का आग्रह किया है।
इन संगठनों ने सवाल उठाया है कि क्या इन हाथियों — दुर्गा, रूपसिंह, शिव, हीरालाल और बिजली — को तोहफे में दिया गया, दान किया गया, खरीदा गया या किसी और तरीके से ट्रांसफर किया गया। साथ ही, उन्होंने इनके मालिकाना हक के रिकॉर्ड, दर्ज उम्र और मालिकाना हक के सर्टिफिकेट की जांच की मांग की है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अन्य संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई एक संयुक्त अर्जी में, इन समूहों ने असम से हर हाथी के ट्रांसफर से जुड़ी परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
मालिकाना हक के रिकॉर्ड पर सवाल
संगठनों का कहना है कि इन पांच हाथियों के लेन-देन को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं, जिनमें तोहफे, दान और खरीद का ज़िक्र है।
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इसलिए, उन्होंने असली मालिकों, मालिकाना हक हासिल करने के तरीके, क्या कोई पेमेंट या कोई और चीज़ शामिल थी, और मालिकाना हक व ट्रांसफर के रिकॉर्ड को साबित करने वाले दस्तावेज़ों की जानकारी मांगी है।
इस अर्जी में 17 जुलाई, 2020 को तमिलनाडु के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) की ओर से पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजे गए उस पत्र का भी ज़िक्र है, जिसमें हाथियों को तोहफे में देने पर लगी पाबंदियों के बारे में बात की गई थी।
हालांकि, समूहों ने साफ़ किया कि वे अधिकारियों से यह मानने के लिए नहीं कह रहे हैं कि हाथियों को गैर-कानूनी तरीके से हासिल या ट्रांसफर किया गया था। इसके बजाय, उन्होंने हर ट्रांसफर से जुड़े रिकॉर्ड और परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच की मांग की।
उम्र और मालिकाना हक के सर्टिफिकेट को लेकर चिंताएं
इस समूह ने हाथियों की उम्र और मालिकाना हक के दस्तावेज़ों में गड़बड़ियों पर भी सवाल उठाए हैं।
संगठनों के अनुसार, तीन हाथियों के मालिकाना हक के सर्टिफिकेट अक्टूबर-नवंबर 2025 में जारी किए गए थे, जबकि उनकी जन्म की तारीखें कई साल पहले की दर्ज थीं।
रूपसिंह के मालिकाना हक के सर्टिफिकेट पर भी सवाल उठाए गए हैं; संगठनों का दावा है कि यह सर्टिफिकेट लगभग सात साल पुराना है, जबकि इसे हर पांच साल में रिन्यू (नवीनीकरण) कराना ज़रूरी होता है।
समूहों ने सरकार से हाथियों की जन्म की तारीखों, उम्र और मालिकाना हक के सर्टिफिकेट के साथ-साथ अधिग्रहण के दस्तावेज़ों, अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC), पहचान के रिकॉर्ड और उपलब्ध माइक्रोचिप या DNA रिकॉर्ड की जांच करने को कहा है। हाथियों को और कहीं भेजने पर रोक लगाने की मांग
संगठनों का कहना है कि यह मामला ज़रूरी हो गया है क्योंकि ऐसी जानकारी मिली है कि असम से तमिलनाडु में जल्द ही छह और युवा हाथियों को भेजा जा सकता है।
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उन्होंने मांग की है कि जब तक तमिलनाडु भेजे जा चुके पांच हाथियों से जुड़े हालात की जांच नहीं हो जाती, तब तक ऐसे और हाथियों को भेजने पर रोक लगाई जाए।
गठबंधन ने असम से तमिलनाडु तक की लगभग 3,000 किलोमीटर की यात्रा को लेकर भी भलाई से जुड़ी चिंताएं जताई हैं; उनका कहना है कि यह यात्रा नौ दिन से भी कम समय में पूरी की गई थी।
संगठनों के अनुसार, अपनी बात के समर्थन में पेश की गई तस्वीरों और वीडियो में हाथियों को जंजीरों से बंधा हुआ, कानों से पकड़कर ले जाया जाता हुआ, कानों के छेदों से रस्सियां ​​डालकर काबू में किया जाता हुआ और उन पर सवारी करके या डंडों से हांकते हुए दिखाया गया है।
इसलिए, उन्होंने उन पांचों हाथियों की उम्र, ऊंचाई और शारीरिक स्थिति की जांच-पड़ताल के साथ-साथ एक स्वतंत्र पशु-चिकित्सक से उनकी जांच कराने की मांग की है।
मंदिर की रस्मों में इस्तेमाल को लेकर चिंताएं
संगठनों ने मंदिर की रस्मों और जुलूसों में हाथियों के प्रस्तावित इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं।
उन्होंने तमिलनाडु कैप्टिव एलिफेंट्स (मैनेजमेंट एंड मेंटेनेंस) रूल्स, 2011 के नियम 20 का हवाला देते हुए यह पता लगाने की मांग की है कि क्या हाथी उम्र और ऊंचाई से जुड़े ज़रूरी नियमों को पूरा करते हैं या नहीं।
समूहों का दावा है कि काम के लिए तय छह-फुट की ऊंचाई की सीमा के मुकाबले ये हाथी कम ऊंचाई वाले लग रहे हैं और उन्होंने अधिकारियों से ऐसी गतिविधियों के लिए उनकी उपयुक्तता की जांच करने को कहा है।
'पीपल फॉर कैटल इन इंडिया' (PFCI) के अरुण प्रसन्ना जी. ने कहा, "किसी और युवा हाथी को असम से तमिलनाडु के मंदिर में हज़ारों किलोमीटर दूर भेजने से पहले, सरकार को यह पक्का करना चाहिए कि ये पांच हाथी यहां कैसे आए — क्या वे तोहफ़े में मिले थे या खरीदे गए थे, उनका मालिक कौन था, और क्या उनके मालिकाना हक और उम्र के रिकॉर्ड जांच में सही पाए जाते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "अब प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि और युवा हाथियों को भेजने से पहले इन पांचों हाथियों से जुड़े तथ्यों का पता लगाया जाए।"
संगठनों ने तमिलनाडु सरकार से मांग की है कि वह इन पांचों हाथियों को हासिल करने और उनके मालिकाना हक के पूरे इतिहास को स्पष्ट करे और उनकी दर्ज जन्म-तारीखों, उम्र और मालिकाना हक के सर्टिफ़िकेट की पुष्टि करे। उन्होंने हाथियों को हासिल करने, मालिकाना हक, पहचान और परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के साथ-साथ एक स्वतंत्र पशु-चिकित्सक से उनकी जांच कराने की भी मांग की है। इन समूहों ने अधिकारियों से यह भी आग्रह किया कि वे मंदिर की रस्मों और जुलूसों में हाथियों के प्रस्तावित इस्तेमाल की जांच करें और उचित कार्रवाई करें।
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