असम

घाट पर सवारियों से भरी नाव को दूसरी नाव ने मारी टक्कर, असम में मची अफरा-तफरी

Kavita2
31 Oct 2026 11:55 AM IST
घाट पर सवारियों से भरी नाव को दूसरी नाव ने मारी टक्कर, असम में मची अफरा-तफरी
x

गुवाहाटी। असम के बारपेटा जिले में शुक्रवार शाम ब्रह्मपुत्र नदी में एक बड़ा नाव हादसा हो गया। बाहरी घाट (बहारी फेरी घाट) के पास 100 से अधिक यात्रियों को ले जा रही दो मशीनीकृत यात्री नावें आपस में टकरा गईं। इस दुर्घटना में कई यात्री घायल हो गए। हादसे के बाद नदी के घाट पर अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों के बीच चीख-पुकार शुरू हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक नाव दक्षिणी किनारे से बाहरी घाट की ओर आ रही थी, जबकि दूसरी नाव घाट पर खड़ी थी और उसमें यात्री सवार हो रहे थे। इसी दौरान तेज गति से आ रही नाव का नियंत्रण बिगड़ गया और वह खड़ी नाव से जा टकराई।

इस घटना ने एक बार फिर असम में ब्रह्मपुत्र नदी के रास्ते होने वाले यात्री परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नदी के आसपास बसे कई इलाकों में लोगों के आवागमन के लिए नावें महत्वपूर्ण साधन हैं। रोजाना बड़ी संख्या में लोग कामकाज, बाजार, शिक्षा और अन्य जरूरी कार्यों के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में नावों की आवाजाही के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है।

घाट के पास बिगड़ा नाव का संतुलन

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार शाम एक मशीनीकृत यात्री नाव ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी किनारे से यात्रियों को लेकर बाहरी घाट की तरफ आ रही थी। दूसरी नाव पहले से ही घाट पर खड़ी थी। उसमें यात्री सवार हो रहे थे और वह आगे की यात्रा के लिए तैयार की जा रही थी।

इसी बीच आने वाली नाव जब घाट के करीब पहुंची, तभी अचानक उसका नियंत्रण बिगड़ गया। नाव चालक समय रहते दिशा और गति को नियंत्रित नहीं कर पाया। इसके बाद नाव सीधे घाट पर खड़ी दूसरी यात्री नाव से टकरा गई। टक्कर इतनी अचानक हुई कि दोनों नावों में मौजूद यात्रियों को संभलने का मौका नहीं मिला।

हादसे के बाद दोनों नावों में सवार लोगों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कई यात्री घबराकर इधर-उधर भागने लगे। नावों में सवार कुछ लोग टक्कर के कारण घायल हो गए। घाट पर मौजूद लोगों ने तत्काल सहायता के प्रयास शुरू किए।

घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया

दुर्घटना में घायल हुए यात्रियों को तत्काल उपचार के लिए चेंगा मॉडल अस्पताल पहुंचाया गया। यहां उन्हें भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में घायलों की सटीक संख्या और उनकी चोटों की गंभीरता की पुष्टि नहीं हो सकी है।

स्थानीय स्तर पर हादसे की जानकारी फैलते ही घाट पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टक्कर के बाद कुछ समय के लिए वहां काफी अफरा-तफरी का माहौल रहा। यात्री अपने परिजनों और परिचितों की जानकारी जुटाने में लगे रहे।

राहत की बात यह रही कि शुरुआती रिपोर्टों में इस घटना में किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, घायलों की स्थिति और हादसे में हुए नुकसान का पूरा आकलन सामने आना बाकी है।

लाइफ जैकेट नहीं होने के आरोप से बढ़ी चिंता

इस हादसे के बाद नावों में सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया गया है कि दुर्घटना में शामिल दोनों मशीनीकृत नावों में पर्याप्त लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं थीं।

यदि टक्कर के कारण कोई नाव पलट जाती या यात्री नदी में गिर जाते, तो बिना लाइफ जैकेट के उनके लिए जान बचाना बेहद मुश्किल हो सकता था। ब्रह्मपुत्र जैसी बड़ी और तेज बहाव वाली नदी में नावों के संचालन के दौरान सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।

हालांकि, लाइफ जैकेट की वास्तविक स्थिति और दोनों नावों में उपलब्ध सुरक्षा संसाधनों को लेकर अभी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। इस पहलू की पुष्टि संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

टक्कर के बाद घाट से हटाई गईं दोनों नावें

घटना के तुरंत बाद दोनों नावें बहारी घाट से हटकर वहां से चली गईं। इससे हादसे के बाद उनकी तकनीकी स्थिति और दुर्घटना के तत्काल कारणों की जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, घटना के समय एक नाव यात्रियों को लेकर घाट पर पहुंच रही थी और दूसरी नाव यात्रियों को बैठा रही थी।

जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों नावों की गति कितनी थी, घाट के पास आवाजाही के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं और नाव चालक के पास पर्याप्त अनुभव तथा आवश्यक अनुमति थी या नहीं।

इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि घाट पर एक समय में दो नावों के संचालन और यात्रियों को बैठाने की व्यवस्था किस तरह की गई थी। यदि घाट पर पर्याप्त निगरानी और सुरक्षित दूरी बनाए रखने के इंतजाम होते, तो ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती थी।

ब्रह्मपुत्र में यात्री सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल

असम के नदी तटीय क्षेत्रों में नाव परिवहन स्थानीय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई स्थानों पर पुलों और सड़क संपर्क की सीमित उपलब्धता के कारण लोगों को एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंचने के लिए नावों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में यात्री नावों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी है।

बारपेटा के बहारी घाट पर हुई इस घटना ने नावों की फिटनेस, यात्रियों की निर्धारित संख्या, चालक की जिम्मेदारी और लाइफ जैकेट जैसी बुनियादी सुविधाओं की निगरानी की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि घाट पर नियमित निगरानी, नावों की तकनीकी जांच और यातायात व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल इस दुर्घटना में घायलों का उपचार किया जा रहा है। हादसे की वास्तविक वजह और सुरक्षा नियमों के पालन में हुई संभावित चूक की विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। शुक्रवार शाम हुए इस हादसे ने नदी में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

Next Story