
Assam असम: असम में राजनीतिक सरगर्मी के बीच ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के अध्यक्ष मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्य में अपनी राजनीतिक पहचान खो चुकी है और अब उसकी स्थिति मुस्लिम लीग जैसी पार्टी की हो गई है।
राज्य में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अजमल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “असम में कांग्रेस खत्म हो चुकी है। कांग्रेस मुस्लिम लीग बन गई है।” उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। अजमल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब असम की राजनीतिक स्थिति में लगातार बदलाव देखा जा रहा है और विभिन्न दल अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे हैं।
इसी बीच बदरुद्दीन अजमल ने खुद भी सक्रिय राजनीति में वापसी करते हुए बिन्नाकांडी सीट से जीत दर्ज की है। उन्होंने असम जातीय परिषद के उम्मीदवार रेजाउल करीम चौधरी को 35,380 वोटों के अंतर से हराया। अजमल को कुल 1,19,721 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी को 84,341 वोट प्राप्त हुए। वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से असम गण परिषद के शहाब उद्दीन मजूमदार मैदान में थे, जिन्हें 20,955 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे।
यह जीत अजमल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह उनकी 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद राज्य की राजनीति में वापसी का संकेत है। इससे पहले वह धुबरी लोकसभा सीट से कांग्रेस नेता रकीबुल हुसैन से चुनाव हार गए थे। उस हार से पहले अजमल लगातार तीन बार धुबरी सीट से संसद सदस्य रह चुके हैं।
AIUDF प्रमुख ने वर्ष 2005 में पार्टी की स्थापना के बाद 2006 के विधानसभा चुनाव में पहली बार दक्षिण सलमारा सीट से जीत दर्ज कर राजनीति में कदम रखा था। तब से पार्टी असम की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही है और इसे विशेष रूप से बंगाली भाषी मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधि माना जाता है।
हालांकि हाल के विधानसभा चुनाव में AIUDF का प्रदर्शन कमजोर रहा और पार्टी केवल दो सीटें जीत सकी, जो अब तक का उसका सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है। इसके बावजूद बिन्नाकांडी सीट पर अजमल की जीत को पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
होजई जिले में स्थित बिन्नाकांडी सीट 2023 के परिसीमन के बाद नए निर्वाचन क्षेत्रों में शामिल की गई थी। इस सीट पर जीत हासिल कर अजमल ने न केवल व्यक्तिगत राजनीतिक वापसी की है, बल्कि पार्टी को भी नए क्षेत्र में आधार मजबूत करने का अवसर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजमल का यह बयान और उनकी जीत दोनों ही असम की राजनीति में आने वाले समय में नए समीकरणों की ओर इशारा करते हैं।





