असम
असम में एक लाख पक्षियों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला, ड्रोन पर रोक
Ratna Netam
6 Nov 2026 8:51 PM IST

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गुवाहाटी। असम में प्रवासी पक्षियों के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य में एक लाख से अधिक अमूर फाल्कन पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उनके बसेरे वाले इलाकों के आसपास अनधिकृत ड्रोन उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस फैसले का मकसद लंबी दूरी तय करके असम पहुंचने वाले इन दुर्लभ प्रवासी पक्षियों को किसी भी तरह की परेशानी से बचाना और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना है।अमूर फाल्कन दुनिया के उन प्रवासी पक्षियों में शामिल हैं, जो हर साल हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं। ये छोटे आकार के शिकारी पक्षी अपने असाधारण प्रवास के लिए जाने जाते हैं। पूर्वोत्तर भारत इनके प्रवास मार्ग का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यहां ये पक्षी कुछ समय रुककर भोजन प्राप्त करते हैं और आगे की लंबी यात्रा के लिए ऊर्जा जुटाते हैं।
पक्षियों की सुरक्षा के लिए ड्रोन उड़ानों पर प्रतिबंध
असम में अमूर फाल्कन के बसेरे वाले क्षेत्रों के आसपास बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने पर रोक लगाने का निर्णय पक्षियों की सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ड्रोन की आवाज और उनकी अचानक गतिविधियों से पक्षियों के झुंड में घबराहट पैदा हो सकती है। विशेष रूप से तब, जब बड़ी संख्या में पक्षी एक ही स्थान पर विश्राम कर रहे हों।वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, प्रवासी पक्षियों के विश्राम स्थलों पर अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप उनके प्राकृतिक व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में ड्रोन उड़ानों को नियंत्रित करना संरक्षण की दिशा में उपयोगी उपाय हो सकता है।इस प्रतिबंध का उद्देश्य पक्षियों को शांत वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना किसी व्यवधान के अपने प्रवास की अगली यात्रा के लिए तैयार हो सकें।
असम के दो जिलों में बड़ी संख्या में पहुंचे अमूर फाल्कन
राज्य के पर्यावरण एवं वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ के अनुसार, इस वर्ष एक लाख से अधिक अमूर फाल्कन असम पहुंचे हैं। इनमें बड़ी संख्या में पक्षी दीमा हसाओ जिले के उमरांगसो और मोरीगांव जिले के धरमतुल इलाके में एकत्र हुए हैं। ये दोनों स्थान प्रवासी पक्षियों के महत्वपूर्ण विश्राम स्थलों के रूप में पहचाने जाते हैं।वन मंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे इन पक्षियों की प्राकृतिक गतिविधियों में किसी तरह का हस्तक्षेप न करें। उन्होंने कहा कि इतनी लंबी यात्रा करने वाले पक्षियों के लिए सुरक्षित विश्राम स्थल उपलब्ध कराना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वन विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश
शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को असम के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. विनय गुप्ता ने इस संबंध में आदेश जारी किया। आदेश के तहत अमूर फाल्कन के चिह्नित बसेरों और उनके आसपास मनोरंजन, व्यावसायिक तथा अन्य गैर-जरूरी उद्देश्यों से अनधिकृत ड्रोन उड़ाने, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर रोक लगाई गई है।संबंधित संभागीय वन अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों की पहचान करने, उनकी सीमाएं निर्धारित करने और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से अस्थायी नो-ड्रोन जोन भी घोषित किए जा सकेंगे। यह प्रतिबंध पक्षियों की मौसमी उपस्थिति तक या अगले आदेश तक लागू रहेगा।
20 हजार किलोमीटर की यात्रा करते हैं ये पक्षी
अमूर फाल्कन का वैज्ञानिक नाम Falco amurensis है। ये पक्षी पूर्वी एशिया से दक्षिणी अफ्रीका तक लगभग 20 हजार किलोमीटर की मौसमी प्रवास यात्रा करते हैं। इस दौरान पूर्वोत्तर भारत इनके लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बनता है।यात्रा के दौरान पक्षियों को पर्याप्त भोजन और आराम की जरूरत होती है। अमूर फाल्कन मुख्य रूप से कीटों को खाते हैं। असम के जंगल, जलाशय और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र इन्हें भोजन और सुरक्षित विश्राम का अवसर प्रदान करते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार उड़ान भरने के लिए मजबूर होने से पक्षियों की ऊर्जा अनावश्यक रूप से खर्च होती है। इसका असर उनकी आगे की प्रवास यात्रा पर पड़ सकता है।
सोशल मीडिया के लिए ड्रोन उड़ाने पर चिंता
वन्यजीव संरक्षण संगठन आरण्यक ने हाल ही में पक्षियों के झुंड के करीब ड्रोन उड़ाकर वीडियो बनाने की घटनाओं पर चिंता जताई थी। संगठन के अनुसार, ड्रोन के तेजी से घूमते पंख पक्षियों के लिए चोट लगने का खतरा पैदा कर सकते हैं।आरण्यक ने प्रशासन से बसेरों के आसपास नो-ड्रोन बफर जोन बनाने की मांग की थी। संगठन ने सरकार के प्रतिबंध संबंधी आदेश का स्वागत किया है। आरण्यक के संगठन सचिव उदयन बोरठाकुर ने इस बात पर जोर दिया कि फोटोग्राफी और सोशल मीडिया सामग्री के लिए पक्षियों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील
वन विभाग ने पर्यटकों, फोटोग्राफरों, कंटेंट क्रिएटर्स और स्थानीय समुदायों को जागरूक करने के निर्देश भी दिए हैं। अधिकारियों का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि प्रवासी पक्षियों को देखने और उनकी तस्वीरें लेने के दौरान उनके प्राकृतिक व्यवहार में बाधा नहीं पहुंचनी चाहिए।असम सरकार का यह फैसला जैव विविधता संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के साथ जिम्मेदार वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है।अमूर फाल्कन का हर साल असम पहुंचना राज्य की प्राकृतिक संपदा और पारिस्थितिक महत्व को दर्शाता है। इन पक्षियों के संरक्षण के लिए प्रशासनिक निगरानी के साथ स्थानीय समुदायों और पर्यटकों की भागीदारी भी जरूरी होगी।
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