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असम STF की बड़ी कार्रवाई, करोड़ों की साइबर ठगी का पर्दाफाश, 6 गिरफ्तार
Ratna Netam
2 Nov 2026 8:32 PM IST

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गुवाहाटी। असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय धोखाधड़ी में शामिल एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह विभिन्न बैंक खातों का इस्तेमाल कर संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को अंजाम दे रहा था। इन खातों को 'म्यूल अकाउंट्स' कहा जाता है, जिनके जरिए धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है। मामले में सबसे गंभीर पहलू पाकिस्तान स्थित खुफिया ऑपरेटिव्स से संदिग्ध संपर्क सामने आना है। हालांकि, इस संबंध में जांच अभी जारी है और किसी विदेशी खुफिया एजेंसी की संलिप्तता की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।सोमवार, 2 नवंबर 2026 को सामने आई जानकारी के मुताबिक, असम STF ने केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर गुवाहाटी के अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई की। इस अभियान में छह संदिग्धों को गिरफ्तार करने के साथ मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क पिछले लगभग दो वर्षों से देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय था।
सैन्य खुफिया एजेंसी से मिले इनपुट के बाद कार्रवाई
मामले की शुरुआत केंद्रीय एजेंसियों, विशेष रूप से तेजपुर स्थित गजराज मिलिट्री इंटेलिजेंस से प्राप्त सूचनाओं के बाद हुई। खुफिया जानकारी में ऐसे संदिग्ध बैंक खातों का उल्लेख किया गया था, जिनके माध्यम से बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन किए जा रहे थे।इसके बाद सोनितपुर पुलिस की शिकायत के आधार पर असम STF थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बैंक खातों की गतिविधियों, रकम जमा होने और निकासी के तरीके की जांच शुरू की।शुरुआती जांच में गुवाहाटी के चांदमारी थाना क्षेत्र स्थित गणेश नगर की निवासी मरजीना बेगम के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया खाते में संदिग्ध लेनदेन का पता चला।जांच अधिकारियों के अनुसार, 22 जून से 5 अगस्त 2026 के बीच महज 47 दिनों में इस खाते में लाखों रुपये जमा हुए। खास बात यह थी कि रकम जमा होने के कुछ समय बाद ही उसे निकाल लिया जाता था। लगातार हो रहे इस तरह के लेनदेन ने जांच एजेंसियों का संदेह बढ़ा दिया।
28 अक्टूबर को तीन आरोपियों की गिरफ्तारी
बैंक खाते की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को गुवाहाटी के बामुनीमैदान इलाके के रहने वाले दो युवकों की कथित संलिप्तता के संकेत मिले। इनकी पहचान 22 वर्षीय मोफिजुल हक और 19 वर्षीय हिमांशु दास के रूप में हुई।जांच में दोनों के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़े होने की बात सामने आई। इसके बाद STF ने 28 अक्टूबर को विशेष अभियान चलाकर मरजीना बेगम, मोफिजुल हक और हिमांशु दास को गिरफ्तार कर लिया।कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन और कुछ दस्तावेज बरामद किए। इनकी जांच में अन्य लोगों की संभावित भूमिका का पता चला।पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों के नाम सामने आए। इसी आधार पर STF ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया।
दो दिनों में तीन और आरोपी पकड़े गए
पहली कार्रवाई के बाद असम STF ने 29 अक्टूबर को चांदमारी थाना क्षेत्र के गणेश बागर इलाके से 34 वर्षीय रकीब हुसैन को गिरफ्तार किया।इसके अगले दिन यानी 30 अक्टूबर को पुलिस ने दो अन्य संदिग्धों को हिरासत में लिया। इनमें 25 वर्षीय इफ्तार हुसैन और 20 वर्षीय अरमान अजुज हक शामिल हैं।इफ्तार हुसैन को लताशिल थाना क्षेत्र के उजानबाजार से पकड़ा गया, जबकि अरमान की गिरफ्तारी नूनमाटी थाना क्षेत्र के आनंद नगर इलाके से हुई।इन गिरफ्तारियों के साथ मामले में पकड़े गए लोगों की संख्या छह हो गई। कार्रवाई में गुवाहाटी सिटी पुलिस ने भी STF की सहायता की।छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए। पुलिस अब इन उपकरणों और दस्तावेजों के आधार पर संदिग्ध रकम के प्रवाह की जांच कर रही है।
क्या होते हैं म्यूल अकाउंट्स और कैसे होती है धोखाधड़ी?
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अपराध से प्राप्त रकम को एक व्यक्ति या खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है।साइबर अपराधी कई बार लोगों को कमीशन या नौकरी का लालच देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। कुछ मामलों में खाताधारक जानबूझकर इस गतिविधि में शामिल होते हैं, जबकि कुछ लोग धोखाधड़ी का शिकार बनकर अनजाने में अपने खाते उपलब्ध करा देते हैं।ऐसे खातों में रकम पहुंचने के बाद उसे तेजी से दूसरे खातों में भेजा जाता है या नकद निकाल लिया जाता है। इससे वास्तविक अपराधियों तक पहुंचना और धन के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।असम के इस मामले में भी जांचकर्ताओं को कई खातों के जरिए संदिग्ध रकम स्थानांतरित किए जाने के संकेत मिले हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन खातों में रकम कहां से आई और अंततः किन लोगों तक पहुंची।
दो वर्षों से सक्रिय होने का संदेह
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि कथित गिरोह लगभग दो वर्षों से देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय था। पुलिस को आशंका है कि इसके जरिए कई करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।जांच एजेंसियों का यह भी मानना है कि नेटवर्क का कथित सरगना असम के बाहर से गतिविधियों का संचालन कर रहा हो सकता है। वह अन्य सदस्यों को दूर से निर्देश देकर बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन का प्रबंधन कर रहा था।हालांकि, कथित सरगना की पहचान और ठगी की वास्तविक राशि को लेकर जांच जारी है। पुलिस ने अभी तक धोखाधड़ी की अंतिम रकम सार्वजनिक नहीं की है।
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से संदिग्ध संपर्क
इस मामले में पाकिस्तान स्थित खुफिया ऑपरेटिव्स से संभावित संबंधों की जांच सबसे संवेदनशील पहलुओं में शामिल है।जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का किसी विदेशी खुफिया नेटवर्क से संबंध था या नहीं। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस नेटवर्क का इस्तेमाल अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए तो नहीं किया गया।फिलहाल पाकिस्तान से कथित संपर्क जांच का विषय है। जांच पूरी होने से पहले गिरफ्तार व्यक्तियों को किसी विदेशी खुफिया एजेंसी का सदस्य या सहयोगी मानना उचित नहीं होगा।
अन्य सदस्यों और बैंक खातों की तलाश जारी
असम STF अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्ध व्यक्तियों और बैंक खातों की पहचान करने में जुटी है। जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिलने वाली जानकारी जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।पुलिस का उद्देश्य संदिग्ध लेनदेन की पूरी श्रृंखला का पता लगाना, धोखाधड़ी से प्रभावित लोगों की पहचान करना और कथित गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचना है।इस कार्रवाई ने साइबर अपराधों में बैंक खातों के दुरुपयोग और संगठित वित्तीय धोखाधड़ी की चुनौती को एक बार फिर उजागर किया है। मामले में आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि कथित नेटवर्क का वास्तविक विस्तार कितना बड़ा था और पाकिस्तान से संदिग्ध संबंधों के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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