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लंदन: मशहूर असमिया गायक, संगीतकार और फिल्म निर्माता भूपेन हजारिका की जन्मशती के मौके पर लंदन के नेहरू सेंटर में 9 अक्टूबर को 'गंगा बहती हो क्यों' नाम का एक म्यूज़िकल प्रोग्राम आयोजित किया गया। इसमें मशहूर कलाकार सुनीता भुइयां और मयूख हजारिका के साथ-साथ 'लुइटपोरिया डांस एनसेंबल' ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया।
असम सरकार के सांस्कृतिक मामलों के विभाग ने यूके में भारतीय उच्चायोग के साथ मिलकर इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें ब्रिटिश और एशियाई मूल के लोगों, सांस्कृतिक हस्तियों, गणमान्य व्यक्तियों और हाउस ऑफ लॉर्ड्स व अन्य प्रमुख संस्थानों के सदस्यों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
न्यूयॉर्क से जुड़े भूपेन हजारिका के बेटे तेज हजारिका के वीडियो संदेश ने दर्शकों का दिल जीत लिया और इस जन्मशती श्रद्धांजलि कार्यक्रम में एक व्यक्तिगत जुड़ाव भी जोड़ा।
इस कार्यक्रम को वायलिन वादक सुनीता भुइयां ने तैयार किया था, जो सूरज फाउंडेशन में कला और संस्कृति की मुख्य क्यूरेटर हैं। वह हजारिका के संगीत, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं।
शाम की शुरुआत नेहरू सेंटर के निदेशक नओरेम जे. सिंह ने क्यूरेटर, कलाकारों और समुदाय के नेताओं (जिनमें असम चैरिटी ट्रस्ट के सदस्य भी शामिल थे) के साथ मिलकर पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित करके की।
श्रद्धांजलि के हिस्से के तौर पर, सूरज फाउंडेशन ने हजारिका पर लिखी गई और असम पब्लिकेशन बोर्ड द्वारा प्रकाशित एक किताब की प्रतियां नेहरू सेंटर और असम चैरिटी ट्रस्ट को भेंट कीं। यह किताब असम में 8 सितंबर, 2025 को जन्मशती वर्ष की शुरुआत में जारी की गई थी।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत 'लुइटपोरिया डांस एनसेंबल' (जिसका नेतृत्व चीनू किशोर कर रहे थे) की प्रस्तुति से हुई। यह प्रस्तुति हजारिका की एक संस्कृत रचना पर आधारित थी, जिसे सांस्कृतिक नेता उमा सुब्रमण्यम ने तैयार किया था।
लंदन में रहने वाली असमिया मीडिया हस्ती हीरामोनी शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया और हजारिका के जीवन व करियर से जुड़े किस्से और महत्वपूर्ण घटनाएं साझा कीं।
इस शाम का एक खास आकर्षण भूपेन हजारिका के भतीजे मयूख हजारिका की प्रस्तुति थी। उन्होंने तीन भाषाओं में गाए गए 'बिस्तिर्नो पारोरे' के साथ-साथ बंगाली में 'आमी एक जाजाबोर' और 'आकाशी गंगा बिसोरा नई' से दर्शकों का मन मोह लिया। उनकी गहरी आवाज़ और मशहूर संगीतकार के बोल और धुनों को पेश करने के अंदाज़ ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
इसके बाद सुनीता भुइयां ने वायलिन पर प्रस्तुति दी, जिसकी शुरुआत हज़ारिका के पसंदीदा भजन 'वैष्णव जन तो' से हुई और इसमें 'दिल हूम हूम करे' भी शामिल था। उन्होंने लंदन में रहने वाले पियानोवादक रोनोजित भुइयां के साथ मिलकर एक क्लासिकल डुएट, 'झूठी-मूठी मितवा / स्नेहे अमर' के साथ अपनी प्रस्तुति समाप्त की।
इन प्रस्तुतियों में संगीतकारों की एक टीम ने साथ दिया, जिसमें तबला और परकशन पर संदीप चक्रवर्ती, कीबोर्ड पर प्रीतम साहा और गिटार पर सिद्धार्थ सिंह शामिल थे।
शाम का समापन सुनीता भुइयां और मयूख हज़ारिका की संयुक्त प्रस्तुति 'वी आर ऑन द सेम बोट, ब्रदर' के साथ हुआ। इस गाने ने दर्शकों को भी शामिल होने के लिए प्रेरित किया और अंत में दर्शकों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का सम्मान किया।
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