असम

गांव-शहर तक पहुंचता असम का मोबाइल थिएटर, जानें क्यों है महत्वपूर्ण

nidhi
30 Sept 2026 2:57 PM IST
गांव-शहर तक पहुंचता असम का मोबाइल थिएटर, जानें क्यों है महत्वपूर्ण
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असम का मोबाइल थिएटर किसे आकर्षित
असम : मोबाइल थिएटर राज्य की सांस्कृतिक पहचान का एक अहम हिस्सा है। हर सीजन में थिएटर समूह ट्रकों में मंच, पर्दे, लाइट, कॉस्ट्यूम और दूसरी सामग्री लेकर गांवों, कस्बों और शहरों तक पहुंचते हैं। इनके दर्शकों में किसान, शिक्षक, छात्र, महिलाएं, बच्चे और अलग-अलग पेशों से जुड़े लोग शामिल होते हैं।
मोबाइल थिएटर की सबसे बड़ी खासियत इसकी पहुंच है। पारंपरिक शहरी थिएटर के मुकाबले यह सीधे गांवों और छोटे कस्बों तक जाता है। इसी वजह से ऐसे लोग भी थिएटर देख पाते हैं, जिनके लिए बड़े शहरों के सभागारों या सांस्कृतिक संस्थानों तक पहुंच आसान नहीं होती।
इसकी दर्शक संख्या किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। हालांकि ग्रामीण और निम्न-मध्यम वर्ग के दर्शकों की मौजूदगी बड़ी मानी जाती है, लेकिन इसमें अलग-अलग जाति, समुदाय, उम्र और आर्थिक पृष्ठभूमि के लोग साथ बैठकर प्रदर्शन देखते हैं। टिकट की कीमत के आधार पर बैठने की अलग-अलग व्यवस्था भी होती है।
मोबाइल थिएटर केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा। समय के साथ इसके नाटकों में असम की भाषा, पहचान, राजनीति, बाढ़, भ्रष्टाचार, सामाजिक बदलाव और क्षेत्रीय आंदोलनों जैसे विषय भी शामिल होते रहे हैं। इस वजह से मंच स्थानीय समाज में चल रही बहस और बदलाव को सामने लाने का माध्यम भी बन गया।
इसके इतिहास में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। शुरुआती दौर में धार्मिक और पौराणिक कथाओं पर आधारित प्रस्तुतियां ज्यादा होती थीं। बाद के दशकों में सामाजिक मुद्दे, क्षेत्रीय पहचान और समकालीन घटनाएं नाटकों की कहानियों का हिस्सा बनने लगीं।
समय के साथ मनोरंजन और व्यावसायिकता की भूमिका भी बढ़ी। दर्शकों को आकर्षित करने के लिए गीत, नृत्य, एक्शन, बड़े सेट, तकनीक और फिल्मी प्रभाव का इस्तेमाल होने लगा। कुछ थिएटर समूहों ने हॉलीवुड और बॉलीवुड से प्रेरित कहानियों और तकनीकी प्रयोगों को भी स्थानीय अंदाज में मंच पर उतारा। यही कारण है कि मोबाइल थिएटर को सिर्फ परंपरागत कला के रूप में समझना अधूरा होगा। यह एक बड़ा व्यावसायिक ढांचा भी है। एक थिएटर समूह में अभिनेता और निर्देशक ही नहीं, बल्कि संगीतकार, डांसर, तकनीशियन, मेकअप आर्टिस्ट, रसोइये, सफाई कर्मचारी और प्रशासनिक स्टाफ सहित 100 से 200 लोग तक जुड़े हो सकते हैं।
मोबाइल थिएटर स्थानीय रोजगार का भी महत्वपूर्ण जरिया है। हर सीजन में बड़ी संख्या में कलाकारों और पर्दे के पीछे काम करने वालों को रोजगार मिलता है। इसलिए इसका महत्व सांस्कृतिक होने के साथ-साथ आर्थिक भी है।
डिजिटल दौर ने भी इस कला को बदला है। पहले थिएटर समूह गांव-गांव जाकर प्रचार करते थे, लेकिन अब पोस्टर, टीवी, सोशल मीडिया, यूट्यूब और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसके बावजूद लाइव प्रदर्शन इसकी सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है।
मोबाइल थिएटर की अहमियत इस बात में भी है कि यह स्थानीय और वैश्विक संस्कृति के बीच पुल का काम करता है। मंच पर असमिया भाषा और स्थानीय पहचान को महत्व मिलता है, लेकिन साथ ही फिल्मों, नई तकनीक और वैश्विक लोकप्रिय संस्कृति का प्रभाव भी दिखाई देता है।
हाल के समय में इस परंपरा को सुरक्षित रखने की मांग भी बढ़ी है। गौहाटी हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में मोबाइल थिएटर के संरक्षण, नियमन और इससे जुड़े कलाकारों के कल्याण का मुद्दा उठाया गया है। अदालत ने असम सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है।
कुल मिलाकर असम का मोबाइल थिएटर केवल घूमता हुआ मनोरंजन मंच नहीं है। यह राज्य के ग्रामीण और शहरी समाज, भाषा, पहचान, बाजार और बदलती संस्कृति को एक साथ दिखाने वाला सार्वजनिक मंच है। यही वजह है कि असम में इसे कौन देखता है, यह सवाल महत्वपूर्ण है—क्योंकि इसके दर्शक ही इसकी कहानियों, शैली और भविष्य को आकार देते हैं।
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