
Assam असम: वन्यजीव संरक्षण के तहत एक महत्वपूर्ण कदम में एक संदिग्ध आतंकवादी गिरोह से बचाए गए सात सुनहरे लंगूरों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ दिया गया है। इन लुप्तप्राय जानवरों को पश्चिमी असम के बोडोलैंड क्षेत्र में स्थित सिखना ज्वावालाओ नेशनल पार्क में वैज्ञानिक प्रक्रिया और पर्यवेक्षण सूची के तहत पुनः स्थापित किया गया।
यह जानकारी बुधवार को असम के वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने दी। उन्होंने बताया कि इन सुनहरे लंगूरों को सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया के विश्लेषण में पूरी तरह से शामिल किया गया है, ताकि उनकी अनुकूलन क्षमता और जीवित रहने की स्थिरता बनी रहे।
वन विभाग के अनुसार, इन लंगूरों को हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय पासपोर्ट नेटवर्क शुरू किया गया था। इन दुर्लभ वस्तुओं को सुरक्षित स्थान पर सुरक्षित स्थान पर रखा गया था, जिसके बाद उनका स्वास्थ्य परीक्षण और दस्तावेज़ीकरण की प्रक्रिया पूरी की गई।
गोल्डन लंगूर एक अत्यंत आकर्षक और लुप्तप्राय वास्तुशिल्प मशीनरी है, जो मुख्य रूप से असम और आसपास के क्षेत्रों के घने जंगलों में पाई जाती है। इनमें से प्रत्येक प्राकृतिक आवास में लगातार हो रहे व्यवधान, अवैध शिकार और कारणों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। ऐसे में आपके पास सुनिश्चित पासपोर्ट सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
मंत्री जयन्त मल्लाबारुआ ने कहा कि लंगूरों का जंगल में आराम से वापस लौटना वन विभाग, प्रयोगशाला विशेषज्ञ और अन्य संबंधित शिक्षा के संयुक्त अभ्यास का परिणाम है। उन्होंने इसे सुरक्षा नीति की एक बड़ी सफलता बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्रवाई में लोगों के लिए एक सख्त संदेश शामिल है। असम सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में 'जीरो टॉलरेंस' के खिलाफ अवैध शिकार और संपत्तियों पर नीति अपनाई जा रही है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
वन विभाग के अधिकारियों ने लंगूरों को छोड़ने से पहले उनकी स्वास्थ्य स्थिति, व्यवहार और जंगल में जीवित रहने की क्षमता का विस्तृत आकलन किया। विशेषज्ञ ने यह सुनिश्चित किया कि वे अपने प्राकृतिक वातावरण में खुद को ढालें और समूह में सामान्य व्यवहार का चित्रण करें।
प्रशासन पार्क ने बताया कि लंगूरों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए कैमरा ट्रैप और फील्ड मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया जाएगा, ताकि उनके व्यवहार और सुरक्षा पर नजर रखी जा सके। यह प्रक्रिया उनकी सुरक्षा संरक्षण के लिए आवश्यक है।
विशेषज्ञ विशेषज्ञ का कहना है कि इस तरह के महत्वपूर्ण प्रयास न केवल जीवनदान के लिए बचाए जा सकते हैं, बल्कि यह जैव विविधता संरक्षण के व्यापक लक्ष्य को भी मजबूत करते हैं। गोल्डन लंगूर जैसे जानवरों की सुरक्षा के लिए पारिस्थितिक संतुलन अत्यंत आवश्यक है।
असम सरकार ने हाल के वर्षों में अवैध शिकार के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए हैं। इन प्रयासों में पर्यवेक्षण तंत्र को मजबूत करना, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग लाभ और स्थानीय वर्गीकरण संरक्षण से जुड़ना शामिल है।
कुल मिलाकर, सात गोल्डन लंगूरों के राष्ट्रीय उद्यान में असम के ठोस संरक्षण स्थापित करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस घटना में केवल एक सफल बचाव अभियान को शामिल नहीं किया गया है, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त संदेश भी शामिल है कि प्रकृति और उसकी परत की सुरक्षा को किसी भी कीमत पर मंजूरी नहीं दी जाएगी।





