
Assam असम: गुवाहाटी हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा कानूनी झटका देते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई मानहानि शिकायत से जुड़ा हुआ है। शिकायत में पवन खेड़ा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने रिनिकी भुयान शर्मा के खिलाफ कई पासपोर्ट और विदेशी संपत्ति से जुड़े कथित बयान दिए थे।
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा ने 6 अप्रैल को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और उनके साथ कथित रूप से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि खेड़ा द्वारा दिए गए बयानों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है और यह मानहानि के दायरे में आता है।
मामले की सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता के वकील ने बताया कि यह याचिका जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया की सिंगल बेंच के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए पवन खेड़ा को गुवाहाटी हाई कोर्ट में जाने का निर्देश दिया था। इसके बाद उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
कोर्ट ने इस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की थी, जिसके बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। शुक्रवार को कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया और याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद पवन खेड़ा के लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं और अब उनकी गिरफ्तारी की संभावना भी बनी हुई है।
यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें एक तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा हैं और दूसरी तरफ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी शामिल हैं। इस विवाद ने राज्य की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है।
मानहानि के इस मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि बिना किसी ठोस सबूत के सार्वजनिक रूप से लगाए गए आरोपों से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। वहीं, कांग्रेस नेता की ओर से कहा गया है कि उन्होंने जो भी बयान दिए हैं, वह सार्वजनिक जानकारी और राजनीतिक संदर्भों पर आधारित थे।
कोर्ट के इस फैसले के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। संभावना है कि पवन खेड़ा की ओर से आगे भी कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।





