
Assam असम: नई चुनी गई 16वीं असम विधानसभा का पहला सत्र गुरुवार को औपचारिक रूप से शुरू हुआ, जिसमें नवनिर्वाचित विधायकों ने शपथ ग्रहण किया। सत्र की शुरुआत से ही विधानसभा में महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रक्रियात्मक गतिविधियां देखने को मिलीं।
इस दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ विधायक रणजीत कुमार दास को एक बार फिर विधानसभा स्पीकर चुना गया। उन्हें दूसरे कार्यकाल के लिए बिना किसी औपचारिक सहमति विवाद के साथ स्पीकर की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह निर्णय सत्र के शुरुआती चरण में ही प्रमुख चर्चा का विषय बन गया।
चार दिन चलने वाले इस सत्र की शुरुआत BJP विधायक चंद्र मोहन पटवारी के प्रोटेम स्पीकर के रूप में कार्यभार संभालने के साथ हुई। पटवारी 126 सदस्यों वाली विधानसभा के सबसे वरिष्ठ सदस्यों में से एक हैं। उनकी अध्यक्षता में ही शपथ ग्रहण प्रक्रिया शुरू की गई।
प्रोटेम स्पीकर चंद्र मोहन पटवारी ने सबसे पहले राज्य के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma और चार कैबिनेट मंत्रियों को शपथ दिलाई। इनमें असम गण परिषद (AGP) के नेता अतुल बोरा, BJP नेता रामेश्वर तेली और अजंता नियोग, तथा बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (BPF) के विधायक चरण बोरो शामिल हैं।
इसके बाद अन्य सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने शपथ ली। इस दौरान सदन में विविध भाषाई और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिली, जहां विधायकों ने अलग-अलग भाषाओं में शपथ ग्रहण किया।
विधायकों ने असमिया, हिंदी, बंगाली, बोडो, अंग्रेजी और संस्कृत जैसी भाषाओं में शपथ ली, जो राज्य की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है। यह दृश्य विधानसभा की विविधता और लोकतांत्रिक परंपरा का प्रतीक माना गया।
सत्र के दौरान विधानसभा की कार्यवाही शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ी, हालांकि स्पीकर चयन और राजनीतिक संतुलन को लेकर हल्की चर्चा भी देखने को मिली। सत्ता पक्ष का दावा है कि यह प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी की गई है, जबकि विपक्ष ने कुछ प्रक्रियात्मक पहलुओं पर सवाल उठाए हैं।
प्रोटेम स्पीकर की भूमिका में चंद्र मोहन पटवारी ने सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित किया और सभी नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने की प्रक्रिया पूरी करवाई। इसके बाद सदन में आगामी विधायी कार्यों और एजेंडा पर चर्चा की तैयारी शुरू की गई।
कुल मिलाकर 16वीं असम विधानसभा का पहला सत्र राजनीतिक गतिविधियों और औपचारिक प्रक्रियाओं के साथ शुरू हुआ, जिसमें नई सरकार की प्राथमिकताएं और सदन की कार्यप्रणाली की झलक देखने को मिली





