
Assam असम: गुवाहाटी यूनिवर्सिटी में ज्योग्राफी विभाग की प्रोफेसर, पूर्व विभागाध्यक्ष और साइंस फैकल्टी की डीन मधुश्री दास को प्रतिष्ठित रॉयल ज्योग्राफिकल सोसाइटी (इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रिटिश ज्योग्राफर्स के साथ) की फेलोशिप प्रदान की गई है। यह सम्मान उन्हें ज्योग्राफी के क्षेत्र में उनके लंबे समय से किए जा रहे शोध, प्रकाशनों और शैक्षणिक योगदान के लिए दिया गया है।
यह मान्यता उनके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित शोध पत्रों, किताबों और अकादमिक कार्यों के आधार पर दी गई है, जिनमें सामाजिक, सांस्कृतिक और शहरी भूगोल से जुड़े महत्वपूर्ण अध्ययन शामिल हैं।
मधुश्री दास, जो पहले कॉटन कॉलेज (अब कॉटन यूनिवर्सिटी) की छात्रा रह चुकी हैं, ने गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से ज्योग्राफी में एमए, एमफिल और पीएचडी की डिग्री हासिल की है। उनकी विशेषज्ञता सामाजिक भूगोल (Social Geography) में रही है।
उन्होंने 1999 में कॉटन कॉलेज से अपने शिक्षण करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद 2010 में उन्होंने गुवाहाटी यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में जॉइन किया और 2017 में प्रोफेसर बनीं। लंबे शैक्षणिक अनुभव के साथ उन्होंने विभागीय नेतृत्व में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उनकी डॉक्टरेट रिसर्च, जो 2009 में पूरी हुई, असम की आदिवासी महिलाओं के बीच शिक्षा, रोजगार और सामाजिक बदलाव पर केंद्रित थी। यह अध्ययन क्षेत्रीय सामाजिक संरचना को समझने में महत्वपूर्ण माना जाता है।
करीब 27 वर्षों के शिक्षण और शोध अनुभव के दौरान उन्होंने 7 एमफिल और 10 पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है, जबकि वर्तमान में 10 शोधार्थी उनके सुपरविजन में कार्यरत हैं। उनके नाम 72 शोध प्रकाशन, 3 पुस्तकें और 4 संपादित वॉल्यूम दर्ज हैं।
उन्होंने यूजीसी और आईसीएसएसआर द्वारा वित्तपोषित कई शोध परियोजनाएं भी पूरी की हैं और उन्हें विभिन्न अकादमिक अनुदान एवं सम्मान प्राप्त हुए हैं।
मधुश्री दास ने अपने शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रस्तुत किया है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका, जर्मनी, जापान, हंगरी, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम सहित कई देशों में अपने अध्ययन प्रस्तुत किए हैं।
उनके शोध का दायरा सामाजिक, सांस्कृतिक और शहरी भूगोल तक फैला हुआ है, जिसमें जनजातीय अध्ययन, लैंगिक मुद्दे, अपराध और अपराध विज्ञान, मानव-पशु संघर्ष, खाद्य भूगोल और सतत विकास जैसे विषय शामिल हैं।
इस प्रतिष्ठित फेलोशिप को उनके शैक्षणिक योगदान की महत्वपूर्ण मान्यता माना जा रहा है, जिससे विश्वविद्यालय और राज्य दोनों का गौरव बढ़ा है।





