
Assam असम: काजीरंगा नेशनल पार्क से एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है, जहां वन विभाग की अनुभवी कुमकी हथिनी जयमाला का रविवार को निधन हो गया। लगभग 34 वर्षों तक वन विभाग की सेवा करने वाली इस हथिनी के निधन से पूरे फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में शोक की लहर है।
वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने हथिनी को भावभीनी विदाई दी। कई कर्मचारियों की आंखें नम नजर आईं, क्योंकि जयमाला ने अपने लंबे कार्यकाल में न केवल विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं, बल्कि कई खतरनाक ऑपरेशनों में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी।
जयमाला काजीरंगा नेशनल पार्क की उन चुनिंदा कुमकी हाथियों में से एक थी, जिन्हें वन्यजीव संरक्षण और गश्ती अभियानों में उपयोग किया जाता था। वह शिकारियों के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियानों में वनकर्मियों को जंगल के अंदर ले जाने, रेस्क्यू ऑपरेशनों में सहायता करने और कई संवेदनशील अभियानों का हिस्सा रही थी।
वन विभाग के अनुसार, जयमाला का पूरा जीवन काजीरंगा जैसे जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र की सुरक्षा में समर्पित रहा। उसने चुपचाप लेकिन प्रभावी तरीके से वन्यजीवों और जंगल की रक्षा में योगदान दिया।
अधिकारियों ने बताया कि रविवार को जयमाला के निधन की सूचना मिलने के बाद पूरे काजीरंगा नेशनल पार्क क्षेत्र में शोक का माहौल बन गया। कई कर्मचारियों ने उसे याद करते हुए कहा कि वह सिर्फ एक हाथी नहीं, बल्कि टीम का एक महत्वपूर्ण सदस्य थी।
जयमाला की सेवाएं तीन दशकों से अधिक समय तक वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में मिसाल मानी जाती हैं। उसने कई बार मुश्किल परिस्थितियों में भी वनकर्मियों का साथ दिया और ऑपरेशनों को सफल बनाने में मदद की।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि जयमाला जैसी कुमकी हाथियां वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की रीढ़ होती हैं और उनकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उसके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों ने भी सोशल मीडिया के जरिए जयमाला को श्रद्धांजलि दी और उसे काजीरंगा की सुरक्षा का सच्चा प्रहरी बताया।





