असम

Assam में जनसंख्या संकेतकों में सुधार: जन्म के समय सेक्स रेश्यो और TFR में बेहतर प्रदर्शन

Kavita2
25 May 2026 5:12 PM IST
Assam में जनसंख्या संकेतकों में सुधार: जन्म के समय सेक्स रेश्यो और TFR में बेहतर प्रदर्शन
x

Assam असम: केंद्र सरकार द्वारा 2022-24 के लिए जारी किए गए नए जनसांख्यिकी (डेमोग्राफिक) आंकड़ों के अनुसार असम ने प्रमुख सामाजिक संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। रिपोर्ट में जन्म के समय सेक्स रेश्यो और कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate - TFR) जैसे महत्वपूर्ण मानकों में राज्य की प्रगति को दर्शाया गया है।

आंकड़ों के अनुसार, 2022-24 की अवधि में असम में जन्म के समय सेक्स रेश्यो प्रति 1,000 पुरुषों पर 946 महिलाओं का रहा। यह तीन साल का औसत है, जो राज्य में लिंग संतुलन की दिशा में लगातार सुधार को दिखाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 943 रहा, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह बढ़कर 971 तक पहुंच गया।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि असम का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर रहा है। देश का औसत जन्म के समय सेक्स रेश्यो 918 दर्ज किया गया, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में यह 914 और शहरी क्षेत्रों में 928 रहा। इस तुलना में असम का आंकड़ा बेहतर स्थिति को दर्शाता है।

राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ और केरल ने जन्म के समय सेक्स रेश्यो में शीर्ष स्थान हासिल किया है। छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 978 और केरल में 974 दर्ज किया गया। वहीं, उत्तराखंड में सबसे कम 872 का आंकड़ा सामने आया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के समय सेक्स रेश्यो में सुधार सामाजिक जागरूकता, स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का संकेत है। असम में हाल के वर्षों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसका असर इन आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।

रिपोर्ट में कुल प्रजनन दर (TFR) को भी जनसंख्या स्थिरता का महत्वपूर्ण संकेतक माना गया है। असम में TFR में सुधार को राज्य की जनसंख्या संरचना में संतुलन की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि असम सामाजिक और स्वास्थ्य संकेतकों में धीरे-धीरे बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। हालांकि, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर को कम करने के लिए अभी भी निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।

केंद्र सरकार द्वारा जारी यह रिपोर्ट नीति निर्माण के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे राज्यों में स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़ी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

Next Story