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Assam Himanta : बांग्लादेश की स्थिति चिंताजनक, असम पर पड़ सकता है असर

nidhi
7 Jan 2026 7:11 AM IST
Assam Himanta : बांग्लादेश की स्थिति चिंताजनक, असम पर पड़ सकता है असर
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असम पर पड़ सकता है असर

Assam: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को बांग्लादेश में मौजूदा हालात को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि वहां हो रहे घटनाक्रम का असर आने वाले दिनों में असम पर भी पड़ सकता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा और अस्थिर राजनीतिक माहौल न केवल मानवीय दृष्टि से चिंताजनक है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

यहां एक सरकारी कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा,
बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, वह हमारे लिए चिंता का विषय है। वहां हिंदुओं पर अत्याचार दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। हालात वाकई चिंताजनक हैं और हम आने वाले समय में इसका असर असम में भी देख सकते हैं।”
मुख्यमंत्री सरमा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब पिछले कुछ हफ्तों में बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों से हिंदू समुदाय को निशाना बनाकर की गई हिंसा, तोड़फोड़ और हमलों की खबरें सामने आई हैं। बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य के बीच भीड़ की हिंसा, सुनियोजित हमले और छिपे हुए उग्र तत्वों की गतिविधियां वहां एक बड़े संकट के रूप में उभर रही हैं। इन घटनाओं ने न केवल बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल पैदा किया है, बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी चिंता बढ़ा दी है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम की भौगोलिक स्थिति और बांग्लादेश के साथ लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा होने के कारण वहां के हालात का असर स्वाभाविक रूप से राज्य पर पड़ता है। उन्होंने कहा,
“इसलिए हमें बेहद सतर्क रहना होगा और हर गतिविधि पर लगातार नज़र रखनी होगी। हालात पर नजर बनाए रखना समय की मांग है। इसके साथ ही हमें बांग्लादेश के हिंदू समाज को भी नैतिक समर्थन और हिम्मत देनी होगी।”
सरमा ने बांग्लादेश में हिंदू आबादी के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक बड़ा और ऐतिहासिक समुदाय है, जो वहां लंबे समय से रह रहा है। 2022 की जनगणना के अनुसार, बांग्लादेश में हिंदू आबादी लगभग 1.31 करोड़ (13.13 मिलियन) है, जो देश की कुल जनसंख्या का करीब 7.95 प्रतिशत हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी आबादी का असुरक्षित महसूस करना अपने आप में गंभीर विषय है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
असम में आंतरिक सुरक्षा और कट्टरपंथी गतिविधियों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में “जिहादी तत्व” पहले भी मौजूद रहे हैं और इस बात के सबूत पिछले एक दशक में कई बार सामने आए हैं।
उन्होंने कहा,
“असम में जिहादी हैं, और हमें इसके सबूत पिछले 10 सालों में बार-बार मिले हैं। हो सकता है कि कुछ तत्व अभी भी कहीं छिपे हुए हों। हो सकता है कि वे स्लीपर सेल का हिस्सा हों। ये सभी बातें चिंता पैदा करती हैं।”
मुख्यमंत्री का यह बयान राज्य में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समय-समय पर किए गए अभियानों और गिरफ्तारियों की पृष्ठभूमि में आया है। हाल के वर्षों में असम पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने कई मामलों में कथित तौर पर कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया है। सरकार का कहना है कि इन तत्वों का मकसद राज्य में अशांति फैलाना और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाना है।
सरमा ने यह भी स्पष्ट किया कि असम की सुरक्षा हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रही है। राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं, जटिल भू-राजनीतिक स्थिति और पड़ोसी देशों में होने वाले घटनाक्रम सीधे तौर पर यहां की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा,
“असम की सुरक्षा हमेशा चिंता का विषय रही है। जब तक पूरे जियोपॉलिटिकल माहौल में सुधार नहीं होता, तब तक यह चिंता बनी रहेगी। हमें हर स्तर पर सतर्क रहना होगा।”
मुख्यमंत्री के इस बयान के संदर्भ में पुलिस के हालिया खुलासे भी अहम माने जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, पिछले साल दिसंबर महीने में असम और त्रिपुरा से कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इन लोगों पर आरोप था कि उनके कथित तौर पर बांग्लादेश के कट्टरपंथी समूहों के साथ संबंध हैं और उनका उद्देश्य नॉर्थईस्ट क्षेत्र को अस्थिर करना था। जांच एजेंसियों का मानना है कि ये तत्व सीमा पार नेटवर्क के जरिए काम कर रहे थे और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश कर रहे थे।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और सांप्रदायिक तनाव का असर सीमावर्ती भारतीय राज्यों पर पड़ना कोई नई बात नहीं है। इतिहास गवाह है कि जब भी पड़ोसी देश में हालात बिगड़े हैं, तो उसका असर असम, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम जैसे राज्यों में किसी न किसी रूप में देखने को मिला है—चाहे वह अवैध घुसपैठ का मुद्दा हो, शरणार्थियों का दबाव हो या फिर सीमा पार से आने वाली कट्टरपंथी गतिविधियां।
इस पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान राज्य सरकार की उस नीति को भी दर्शाता है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने बार-बार यह दोहराया है कि असम सरकार किसी भी तरह की कट्टरपंथी या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के खिलाफ “ज़ीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाए हुए है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुख्यमंत्री का यह बयान सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश भी है कि आने वाले दिनों में सतर्कता और बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही, यह बयान केंद्र सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति की ओर आकर्षित करता है।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश में बिगड़ते हालात, वहां हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा और उत्तर-पूर्व भारत की संवेदनशील भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए असम सरकार किसी भी संभावित खतरे को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान से साफ है कि राज्य सरकार न केवल सीमा पार घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है, बल्कि आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भी हर जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार है।

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