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बांग्लादेश भेजने के आदेश पर घिरी असम सरकार, गुवाहाटी HC ने मांगा जवाब

Tara Tandi
12 Oct 2026 5:09 PM IST
बांग्लादेश भेजने के आदेश पर घिरी असम सरकार, गुवाहाटी HC ने मांगा जवाब
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गुवाहाटी: गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम सरकार से जानकारी मांगी है कि नगांव फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल (FT) ने किन तारीखों पर जहानारा बेगम और मुमताज़ बेगम नाम की दो महिलाओं को विदेशी घोषित करने वाली अपनी राय तैयार की थी। यह जानकारी तब मांगी गई है जब उनके कानूनी मामले अभी भी लंबित थे और उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया था, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।
7 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान, जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस प्रांजल दास की बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे वे तारीखें और समय बताएं जब ट्रिब्यूनल ने ये राय तैयार की थी।
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ये जानकारी नहीं देती है, तो यह मान लिया जाएगा कि महिलाओं को पुलिस हिरासत में लेने से पहले ये राय "सही समय पर तैयार नहीं की गई थीं"।
हाई कोर्ट इन दोनों मामलों की अलग-अलग सुनवाई कर रहा है, लेकिन दोनों में एक जैसे आदेश दिए हैं। ये आदेश गुरुवार को कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए।
इन दोनों महिलाओं को तब बांग्लादेश भेज दिया गया था जब उनके कानूनी मामले अभी भी लंबित थे, और अभी तक उनके ठिकाने का पता नहीं चल पाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कोर्ट को बताया है कि उन्हें खोजने की कोशिशें जारी हैं।
सुनवाई के दौरान, MEA ने महिलाओं का पता लगाने के लिए और समय मांगा और कहा कि उनके ठिकाने के बारे में पूछताछ अभी भी चल रही है। सितंबर के आखिर में आई रिपोर्टों में कहा गया था कि मीडिया आउटलेट्स द्वारा मुमताज़ के मामले के बारे में संपर्क किए जाने के बाद बांग्लादेशी अधिकारियों ने उसे खोजना शुरू कर दिया था।
सितंबर में, हाई कोर्ट ने असम सरकार को निर्देश दिया था कि वह जांच करे कि नगांव ट्रिब्यूनल ने किन तारीखों पर इन दोनों महिलाओं को विदेशी घोषित करने वाली नई राय तैयार की थी। इन्हीं राय के आधार पर उन्हें निर्वासित (देश से बाहर) किया गया था।
कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, जुरिया स्थित फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल, चौथी नगांव ने 43 वर्षीय मुमताज़ को विदेशी नागरिक घोषित किया था।
उन्हें 13 जून को बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को सौंप दिया गया था और 13-14 जून की रात कछार जिले के कलाइनचेरा इलाके से बांग्लादेश भेज दिया गया था।
इसके बाद हाई कोर्ट ने असम सरकार को निर्देश दिया कि वह उनके पति मुजम्मेल हक को 2 लाख रुपये का अंतरिम मुआवज़ा दे। कोर्ट ने गौर किया कि मुमताज़ को बांग्लादेश भेज दिया गया, जबकि उसके पति या परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को उसकी हिरासत के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी। कोर्ट ने यह भी पाया कि हालात ऐसे थे कि वह ट्रिब्यूनल के फ़ैसले को ठीक से चुनौती नहीं दे पाई।
इन मामलों की वजह से असम में राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। हाल ही में हुए नगांव उपचुनाव के दौरान, विपक्षी दलों ने लोगों को देश से बाहर भेजने (डिपोर्टेशन) के मुद्दे पर राज्य सरकार से सवाल किए।
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) ने बीजेपी उम्मीदवार देवाशीष शर्मा के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई; वे उस समय नगांव के डिप्टी कमिश्नर थे।
असम कांग्रेस ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर उन दो महिलाओं का पता लगाने के लिए उनसे दखल देने की मांग की।
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