
Assam असम: गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना को लेकर राज्य सरकार ने गुवाहाटी हाई कोर्ट को जानकारी दी है कि परियोजना से जुड़ी वन्यजीव और पर्यावरण संबंधी शर्तों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक मंजूरियां प्राप्त कर ली गई हैं और कई सिफारिशों को परियोजना के वाइल्डलाइफ पैसेज प्लान में शामिल किया गया है।
सरकार द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे में कहा गया है कि वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की सिफारिशों के आधार पर अमचांग वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी की सीमा के साथ परियोजना को फिर से डिजाइन किया गया है। इस संशोधित योजना को नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्टैंडिंग कमिटी ने मंजूरी दे दी है।
जानकारी के अनुसार, परियोजना के लिए 7.12 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की अनुमति भी प्राप्त हो चुकी है। इसके साथ ही सैद्धांतिक मंजूरी में कई शर्तें शामिल की गई हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा। इनमें सबसे महत्वपूर्ण शर्त पेड़ों के ट्रांसप्लांटेशन से जुड़ी है, जिसके तहत अधिकतम पेड़ों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की बात कही गई है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पेड़ों की कटाई केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही की जाएगी और यह कार्य राज्य वन विभाग की कड़ी निगरानी में होगा। साथ ही, पेड़ काटने से जुड़ा पूरा खर्च यूजर एजेंसी द्वारा जमा कराया जाएगा।
इसके अलावा, क्षतिपूरक वनीकरण (कंपेनसेटरी अफॉरेस्टेशन) और संबंधित प्रबंधन लागत का भुगतान भी राज्य के CAMPA फंड में किया जाएगा, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके।
स्टैंडिंग कमिटी की सिफारिशों में NH-27 के बसिष्ठा से जोराबाट सेक्शन के विस्तार के दौरान कम से कम 4 किलोमीटर एलिवेटेड रोड बनाए जाने का प्रस्ताव भी शामिल था, ताकि अमचांग वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी और आसपास के वन क्षेत्रों के बीच मौजूद हाथी कॉरिडोर को सुरक्षित रखा जा सके।
सरकार ने अपने हलफनामे में यह भी दावा किया है कि अमचांग वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी और आसपास के आरक्षित वन क्षेत्रों के बीच पारंपरिक हाथी और वन्यजीव कॉरिडोर को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास किए गए हैं, भले ही परियोजना को आवश्यक मंजूरी मिल चुकी हो।
अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के तहत काटे जाने वाले पेड़ों की संख्या को भी कम करके लगभग 450 तक सीमित कर दिया गया है, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की कोशिश की गई है।
यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है, जहां परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय संतुलन और विकास कार्यों के बीच संतुलन को लेकर सुनवाई जारी है।





