
Assam असम: असम में 4 मई को होने वाली विधानसभा वोटों की गिनती से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी और भारत निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में मतपेटियों की सुरक्षा व्यवस्था में अनियमितताएं सामने आ रही हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर संदेह पैदा हो रहा है।
पत्रकारों से बातचीत में गौरव गोगोई ने कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली है कि कुछ स्थानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं को स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदान के दिन कई मतदान केंद्रों पर भाजपा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी देखी गई, जो चुनावी नियमों का उल्लंघन है। कांग्रेस नेता के अनुसार, इस तरह की घटनाएं कई क्षेत्रों से सामने आ रही हैं और इन पर निर्वाचन आयोग को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
गोगोई ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव में अपने प्रदर्शन के बजाय “गलत तरीकों” पर निर्भर रहने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल लगातार इन मुद्दों को उठा रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा बताया और निष्पक्ष चुनाव की मांग दोहराई।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अन्य राज्यों में सामने आए समान मामलों का भी उल्लेख किया और कहा कि स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा में तैनात कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है।
इसके साथ ही गौरव गोगोई ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पुलिस बल का उपयोग जनता की सुरक्षा और नशीली दवाओं की तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों से निपटने के बजाय विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि असम इस समय नशीली दवाओं की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, लेकिन इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
एनडीए की संभावित जीत को लेकर आए एग्जिट पोल पर प्रतिक्रिया देते हुए गौरव गोगोई ने उन्हें “टीआरपी आधारित कवायद” बताया। उन्होंने दावा किया कि चुनावी माहौल में डर का वातावरण था, जिसके कारण कई मतदाता खुलकर अपनी राय व्यक्त नहीं कर पाए।
इस पूरे विवाद के बीच असम में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है और सभी दल चुनाव परिणामों का इंतजार कर रहे हैं। वहीं निर्वाचन आयोग की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।





