
Assam असम: डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन, असम की प्रसिद्ध वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट और कंजर्वेशनिस्ट, को 2026 के वेफाइंडर अवॉर्ड के लिए चुना गया है। उन्हें 15 ग्लोबल सम्मान पाने वालों में शामिल किया गया है। यह सम्मान नेशनल ज्योग्राफिक सोसाइटी और किआ अमेरिका मिलकर दे रहे हैं। इस अवॉर्ड के साथ डॉ. बर्मन के कंजर्वेशन के सफ़र में एक और अंतरराष्ट्रीय मील का पत्थर जुड़ गया है।
डॉ. बर्मन को इस अवॉर्ड के तहत 14 से 18 जून तक वाशिंगटन, डी.सी. में नेशनल ज्योग्राफिक सोसाइटी के स्पॉटलाइट इवेंट में सम्मानित किया जाएगा। वे 13 जून को सेरेमनी में शामिल होने और भाषण देने के लिए यूनाइटेड स्टेट्स की राजधानी के लिए रवाना होंगी।
वेफाइंडर अवॉर्ड छह महाद्वीपों के उन लोगों को दिया जाता है, जो साइंस, कंजर्वेशन, एजुकेशन और स्टोरीटेलिंग के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इसके अलावा, यह अवॉर्ड उन्हें पर्यावरण की सुरक्षा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में उनके योगदान के लिए भी सम्मानित करता है।
डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन को विशेष रूप से उनके कम्युनिटी आधारित कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के लिए पहचाना गया है। उनके प्रयास का केंद्र ग्रेटर एडजुटेंट स्टॉर्क (Leptopilos dubius) है, जिसे स्थानीय लोग हरगिला के नाम से जानते हैं। यह पक्षी गंभीर रूप से संकटग्रस्त है और असम में इसके संरक्षण के लिए डॉ. बर्मन ने अनेक वर्षों तक लगातार काम किया है।
उनके संरक्षण प्रयास में स्थानीय समुदाय को जोड़ना एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है। डॉ. बर्मन ने न केवल पक्षियों के निवास स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि स्थानीय लोगों में पर्यावरण और जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूकता भी फैलाई। उनके प्रोजेक्ट्स ने स्थायी संरक्षण मॉडल को प्रदर्शित किया, जिससे न केवल ग्रेटर एडजुटेंट स्टॉर्क की आबादी में सुधार हुआ, बल्कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी और समर्थन भी बढ़ा।
डॉ. बर्मन के योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना, भारतीय कंजर्वेशनिस्ट समुदाय के लिए गर्व का विषय है। उनके प्रयासों ने दिखाया कि विज्ञान और स्थानीय समुदायों को जोड़कर जैव विविधता की रक्षा की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डॉ. बर्मन जैसे पर्यावरणविद और कंजर्वेशनिस्ट, केवल शोध तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे शिक्षा, जागरूकता और कम्युनिटी इन्वॉल्वमेंट के माध्यम से संरक्षण कार्यों को वास्तविक और स्थायी बनाते हैं। उनका कार्य ग्रेटर एडजुटेंट स्टॉर्क जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए जीवनदायिनी साबित हुआ है।
इस सम्मान से डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान्यता मिली है, और यह युवा वैज्ञानिकों और कंजर्वेशनिस्ट के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। उनके काम ने यह संदेश दिया है कि समर्पण और विज्ञान के सही उपयोग से पर्यावरण संरक्षण में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है।





