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असम CM हिमंत सरमा बोले: अब ध्रुवीकरण की जरूरत नहीं

Kavita2
4 July 2026 10:46 AM IST
असम CM हिमंत सरमा बोले: अब ध्रुवीकरण की जरूरत नहीं
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Assam असम: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए राज्य की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि असम के मूल निवासियों में खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लाने के लिए राज्य को एक ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता थी जो स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाए, और उन्होंने खुद आगे बढ़कर उस भूमिका को निभाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लंबे समय से लोगों के बीच असुरक्षा और आत्मविश्वास की कमी महसूस की जा रही थी। उनके अनुसार, उस समय हालात ऐसे थे कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भरोसे की कमी बढ़ रही थी। उन्होंने दावा किया कि ऐसी स्थिति में एक मजबूत और निर्णायक नेतृत्व की जरूरत थी, जिसने लोगों के भीतर भरोसा पैदा किया।

हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में इसी उद्देश्य को प्राथमिकता दी कि असम के मूल निवासियों का आत्मविश्वास फिर से मजबूत हो सके। उनके अनुसार, सरकार की नीतियों और फैसलों के माध्यम से लोगों में यह भरोसा पैदा करने की कोशिश की गई कि राज्य में शासन सभी के लिए समान रूप से काम कर रहा है और किसी एक समुदाय के पक्ष में नहीं है।

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि अब स्थिति बदल चुकी है और लोगों को यह विश्वास हो गया है कि राज्य में ऐसी सरकार मौजूद है जो किसी एक समुदाय का पक्ष नहीं लेती, बल्कि सभी वर्गों के विकास के लिए काम करती है। उन्होंने कहा कि इस भरोसे के कारण अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही, जिसमें ध्रुवीकरण की आवश्यकता महसूस की जाती थी।

सरमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब असम में ध्रुवीकरण की कोई जरूरत नहीं बची है, क्योंकि समाज में विश्वास का माहौल बन चुका है। उनके अनुसार, जब जनता को यह भरोसा हो जाता है कि सरकार निष्पक्ष है, तो सामाजिक विभाजन की स्थिति स्वतः कमजोर हो जाती है।

उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें उन्होंने न केवल अपने कार्यकाल की भूमिका को रेखांकित किया, बल्कि राज्य की सामाजिक संरचना और राजनीतिक दिशा पर भी टिप्पणी की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह बयान आगामी राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है। उनके अनुसार, असम की राजनीति लंबे समय से पहचान, प्रवासन और सामाजिक समीकरणों के मुद्दों पर केंद्रित रही है, और ऐसे में इस तरह के बयान राजनीतिक विमर्श को नई दिशा दे सकते हैं।

वहीं, विपक्षी दलों की ओर से इस बयान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है, क्योंकि ध्रुवीकरण जैसे शब्द राजनीतिक रूप से संवेदनशील माने जाते हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री का कहना है कि उनकी प्राथमिकता हमेशा राज्य के लोगों में विश्वास और स्थिरता स्थापित करना रही है।

सरकार के समर्थकों का कहना है कि मौजूदा प्रशासन के दौरान विकास कार्यों और प्रशासनिक सुधारों के कारण लोगों में भरोसा बढ़ा है और सामाजिक तनाव में कमी आई है। वहीं, आलोचक इस दावे को राजनीतिक दृष्टिकोण से जोड़कर देख रहे हैं।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का यह बयान असम की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने जहां अपने नेतृत्व की भूमिका को रेखांकित किया है, वहीं यह भी दावा किया है कि अब राज्य में ध्रुवीकरण की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है क्योंकि जनता का भरोसा सरकार पर मजबूत हुआ है।

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