
Assam असम: पश्चिम एशिया में जारी संकट के प्रभावों को देखते हुए असम सरकार ने वित्तीय अनुशासन और मितव्ययिता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर खर्चों में कटौती और संसाधनों के बेहतर उपयोग की आवश्यकता है।
सोमवार को वित्त आयुक्त एवं सचिव जयंत नारलीकर द्वारा ‘कार्यकारी आदेश’ के रूप में जारी ‘खर्च में कटौती के उपायों पर परामर्श’ में कई अहम निर्देश शामिल किए गए हैं। आदेश के अनुसार सरकार ने ईंधन पर होने वाले खर्च में 20 प्रतिशत की कटौती करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही सभी मंत्रियों के काफिले का आकार भी कम किया जाएगा ताकि अनावश्यक व्यय पर नियंत्रण रखा जा सके।
इसके अलावा सरकार ने राजस्व और स्थापना खर्च में 10 प्रतिशत की कटौती का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि इस कटौती के दायरे से वेतन, पेंशन, ऋण चुकाने और अन्य अनिवार्य खर्चों को बाहर रखा गया है, जिससे कर्मचारियों और जरूरी वित्तीय दायित्वों पर कोई प्रभाव न पड़े।
आदेश में यह भी कहा गया है कि राज्य में राजस्व बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएंगे और बिजली की अनावश्यक खपत को रोकने के लिए ऊर्जा ऑडिट कराने जैसे कदम भी लागू किए जाएंगे। इससे ऊर्जा के उपयोग में दक्षता बढ़ाने और खर्च को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने अपने परामर्श में कहा है कि प्रशासनिक हित और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह जरूरी हो गया है कि राज्य वित्तीय अनुशासन को और मजबूत करे। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए देशभर से मितव्ययिता की अपीलें आ रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इन उपायों का उद्देश्य राज्य के वित्तीय संसाधनों का अधिक प्रभावी और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना है, ताकि विकास कार्यों पर इसका सकारात्मक प्रभाव बना रहे।
कुल मिलाकर, असम सरकार का यह निर्णय मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक व्यावहारिक और संतुलित वित्तीय नीति के रूप में देखा जा रहा है।





