
Assam असम: ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ असम (AASAA) की तिनसुकिया ज़िला कमेटी ने मंगलवार को आदिवासी आइकन और स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर बिचाकुपी टी गार्डन में एक विशेष और यादगार कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में कम्युनिटी लीडर, स्टूडेंट्स और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए और मुंडा को श्रद्धांजलि दी।
इवेंट का मुख्य उद्देश्य आदिवासी अधिकारों के लिए उनके संघर्ष और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ उनके योगदान को याद करना था। स्पीकर्स ने उपस्थित लोगों को बिरसा मुंडा के जीवन, उनके नेतृत्व और स्वदेशी समुदायों को संगठित करने की उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मुंडा के आदिवासी अधिकारों, जमीन की रक्षा और पहचान के लिए किए गए प्रयासों पर विशेष प्रकाश डाला।
डूमडूमा के विधायक रूपेश गोवाला भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए और कहा कि वह बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि मनाने के लिए AASAA द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में भाग लेकर गर्व महसूस कर रहे हैं। विधायक ने मुंडा के आदिवासी समुदायों के लिए योगदान को याद करते हुए उनकी विरासत को आज भी प्रेरणादायक बताया।
कार्यक्रम के दौरान मुंडा की तस्वीर के सामने फूल चढ़ाए गए और उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों और आदिवासी समुदाय के लिए उनके किए गए योगदान पर अपने विचार साझा किए। स्टूडेंट्स ने कहा कि बिरसा मुंडा ने सिर्फ संघर्ष ही नहीं किया, बल्कि समुदाय को एकजुट करने का अद्वितीय उदाहरण भी प्रस्तुत किया।
AASAA के पदाधिकारियों ने भी अपने भाषणों में यह संदेश दिया कि बिरसा मुंडा की विरासत आज भी आदिवासी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि मुंडा के आदर्शों को याद रखना और उनके संघर्ष को आगे बढ़ाना प्रत्येक आदिवासी का कर्तव्य है।
स्थानीय समुदाय के लोगों ने इस अवसर को एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम आदिवासी युवाओं को उनके इतिहास और संस्कृति के प्रति जागरूक करते हैं और उन्हें अपने अधिकारों के लिए सतत प्रयास करने के लिए प्रेरित करते हैं।
प्रोग्राम में बिचाकुपी टी गार्डन का शांत वातावरण और फूलों की सजावट ने आयोजन को और भी विशेष बना दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने बिरसा मुंडा के आदर्शों को याद करते हुए उनके योगदान को सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्व देने की प्रतिबद्धता जताई।
इस प्रकार, तिनसुकिया ज़िला में आयोजित यह कार्यक्रम आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक और सामाजिक जागरूकता को बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं में नेतृत्व और संगठन की भावना को भी प्रोत्साहित करने वाला साबित हुआ।





