
नलबाड़ी: असम सरकार भले ही शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और बेहतरी की बातें कर रही हो, लेकिन नलबाड़ी ज़िले के कई सरकारी स्कूल शिक्षकों और सपोर्ट स्टाफ़ की भारी कमी से जूझ रहे हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता और रोज़मर्रा की पढ़ाई-लिखाई पर बुरा असर पड़ रहा है।
ऐसा ही एक स्कूल है 1949 में बना ऐतिहासिक गोपालथान पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूशन (हाई स्कूल), जो बानहजानी के चांदकुची गोपालथान में है। इस स्कूल में अभी पांच क्लास में कुल 354 छात्र हैं, लेकिन कई सालों से यहां टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ़ की भारी कमी है।
मिली जानकारी के मुताबिक, स्कूल में कुल 11 अहम पद खाली पड़े हैं। इनमें असिस्टेंट हेडमास्टर, दो ग्रेजुएट आर्ट्स टीचर, चार ग्रेजुएट साइंस टीचर, दो ग्रेजुएट हिंदी टीचर, दो इंटरमीडिएट आर्ट्स टीचर और ग्रेड III व ग्रेड IV कैटेगरी में सपोर्ट स्टाफ़ के पद शामिल हैं।
स्कूल प्रशासन, स्कूल मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट कमेटी (SMDC), अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने सरकार और शिक्षा विभाग से कई बार खाली पदों को भरने की अपील की है। हालांकि, उनका आरोप है कि अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे मौजूदा स्टाफ़ को भारी दबाव में पढ़ाई-लिखाई का काम संभालना पड़ रहा है।
नलबाड़ी ज़िले के तिहू पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले मखीबाहा शक्तिपारा नवोदय प्राइमरी स्कूल में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। पांच क्लास वाले इस स्कूल को कथित तौर पर सिर्फ़ एक टीचर चला रहे हैं। पांचों क्लास के छात्रों को पढ़ाने के अलावा, यह टीचर प्रशासनिक काम, मिड-डे मील स्कीम से जुड़े रिकॉर्ड रखने और विभाग के अलग-अलग निर्देशों को लागू करने की ज़िम्मेदारी भी निभाते हैं।
शिक्षाविदों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ये दोनों स्कूल एक बड़ी समस्या की बानगी भर हैं, जो नलबाड़ी ज़िले के कई सरकारी स्कूलों को प्रभावित कर रही है। उनका तर्क है कि शिक्षकों की कमी, खाली पद और बुनियादी सुविधाओं की कमी सरकारी शिक्षण संस्थानों में लोगों का भरोसा धीरे-धीरे कम कर रही है।





