असम

बाढ़ में घर बहा, टेंट में रहने को मजबूर 17 वर्षीय जनमोनी ने जीता नेशनल कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड

Kavita2
11 Aug 2026 11:42 AM IST
बाढ़ में घर बहा, टेंट में रहने को मजबूर 17 वर्षीय जनमोनी ने जीता नेशनल कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड
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गुवाहाटी। मुश्किल परिस्थितियां अगर हौसला कमजोर न कर पाएं तो सफलता की राह खुद बनती है। 17 वर्षीय जनमोनी कुंवर ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। नई दिल्ली में आयोजित नेशनल कराटे चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर सोमवार को जब वह अपने घर लौटीं तो उनके सामने जीत की खुशी के साथ परिवार की मुश्किलें भी थीं। पिछले महीने आई विनाशकारी बाढ़ में उनका घर बह गया था और परिवार फिलहाल टेंट में रहने को मजबूर है।

जनमोनी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना सिर्फ खेल उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन कठिन परिस्थितियों के बीच हासिल की गई कामयाबी है, जिनसे उनका परिवार पिछले कुछ समय से गुजर रहा है। बाढ़ ने उनका घर और घरेलू सामान छीन लिया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा और प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर शानदार प्रदर्शन किया।

बाढ़ में बह गया घर

पिछले महीने आई भीषण बाढ़ ने जनमोनी के परिवार को बेघर कर दिया। बाढ़ के पानी की चपेट में आकर उनका घर पूरी तरह बह गया। अचानक आई इस आपदा के बाद परिवार के सामने रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई।

घर नष्ट होने के बाद परिवार के पास फिलहाल स्थायी आश्रय नहीं है। ऐसे में परिवार को टेंट में रहना पड़ रहा है। जरूरी सामान और रोजमर्रा की सुविधाओं की कमी के बावजूद परिवार ने जनमोनी का साथ नहीं छोड़ा।

बाढ़ के कारण जहां परिवार अपने जीवन को दोबारा व्यवस्थित करने में जुटा था, वहीं जनमोनी के सामने राष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी की चुनौती थी। उन्होंने परिस्थितियों से हार मानने के बजाय खेल पर ध्यान बनाए रखा।

दिल्ली में जीता स्वर्ण पदक

नई दिल्ली में आयोजित नेशनल कराटे चैंपियनशिप में जनमोनी ने अपने मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 17 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतना उनके खेल करियर के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग हिस्सों से खिलाड़ी पहुंचे थे। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों में सफलता हासिल करना जनमोनी की मेहनत और प्रतिभा को दर्शाता है।

स्वर्ण पदक जीतने के बाद जब वह सोमवार को अपने घर लौटीं तो परिवार और आसपास के लोगों में खुशी का माहौल बन गया। एक ओर परिवार बाढ़ के बाद अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, वहीं जनमोनी की उपलब्धि ने उनके बीच उम्मीद और खुशी की एक नई वजह दी है।

टेंट में रहकर बेटी की सफलता पर गर्व

जनमोनी के परिवार के लिए उनकी जीत बेहद भावुक कर देने वाली है। जिस परिवार का घर पिछले महीने बाढ़ में बह गया, उसी परिवार की बेटी ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के सामने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

परिवार के सदस्य फिलहाल टेंट में रह रहे हैं, लेकिन जनमोनी की उपलब्धि ने उनके चेहरों पर खुशी ला दी। मुश्किल हालात के बावजूद परिवार ने बेटी के खेल को जारी रखने के लिए उसका हौसला बढ़ाया।

जनमोनी की सफलता यह भी बताती है कि खेल प्रतिभा केवल बेहतर सुविधाओं और संसाधनों की मोहताज नहीं होती। अगर खिलाड़ी में दृढ़ इच्छाशक्ति हो और परिवार का समर्थन मिले तो बेहद कठिन परिस्थितियों में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

आपदा के बीच जारी रखा अभ्यास

बाढ़ के बाद जनमोनी और उनके परिवार के सामने कई चुनौतियां थीं। रहने की जगह, जरूरी सामान और सामान्य जीवन की व्यवस्था करना आसान नहीं था। ऐसे समय में खेल की तैयारी जारी रखना अपने आप में बड़ी चुनौती थी।

इसके बावजूद जनमोनी ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लक्ष्य से खुद को दूर नहीं होने दिया। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों के बीच अपनी तैयारी जारी रखी और प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।

उनकी इस मेहनत का परिणाम स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया। उनकी उपलब्धि परिवार के लिए सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि बाढ़ से हुई तबाही के बीच उम्मीद की किरण भी है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

जनमोनी कुंवर की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो मुश्किल परिस्थितियों के कारण अपने सपनों से पीछे हट जाते हैं। उनके सामने परिवार के बेघर होने जैसी गंभीर समस्या थी, लेकिन उन्होंने अपनी खेल यात्रा को जारी रखा।

राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनकी कहानी अब व्यापक स्तर पर चर्चा में है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, लक्ष्य के प्रति निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास से सफलता हासिल की जा सकती है।

आगे की राह में चुनौतियां बरकरार

हालांकि जनमोनी ने राष्ट्रीय स्तर पर शानदार सफलता हासिल कर ली है, लेकिन उनके परिवार की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। बाढ़ में घर बह जाने के बाद उन्हें स्थायी आवास और सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए काफी प्रयास करना होगा।

जनमोनी की उपलब्धि ने परिवार को मानसिक मजबूती जरूर दी है। अब उम्मीद है कि उनकी सफलता से उन्हें आगे खेल के लिए बेहतर अवसर और सुविधाएं मिलेंगी।

17 वर्षीय इस खिलाड़ी ने राष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर साबित किया है कि मुश्किल हालात प्रतिभा और हौसले को रोक नहीं सकते। जिस समय उनका परिवार टेंट में रहकर जिंदगी दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रहा है, उसी समय जनमोनी का स्वर्ण पदक उनके परिवार के लिए नई उम्मीद और गर्व का प्रतीक बन गया है।

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